बिखर गया है जीवन सारा...
बिखर गया है जीवन सारा ऐसा ही कुछ लगता है अब जन्में कहीं पले -बढे भी वहीं किसका रास्ता ढूंढ रहे थे जाने-अनजाने चले आये यहाँ रोटी, कपडा और मकान तलाशे जैसे-तैसे बसाया घर अपना अपने घर को ही भूल गए सदियों हुए फले -फुले यहीं शायद बिखर भी जाएं किसको है मंज़िल का पता आये हैं तो जायेंगे भी फिर बस बारी-बारी जाना है बिखर गया है जीवन सारा ऐसा ही कुछ लगता है अब ऐसा ही कुछ लगता है अब ! ~ फ़िज़ा