अपनी ज़िन्दगी अपने हाथ
इस बीच थोड़ी मेरी नौकरी की तरफ केशियर की ज़िन्दगी नोट गिनना नहीं खाना बनाना, झाड़ू लगाना बर्तन धोना कई बार लगा इतनी दूर आकर क्या किया विकसित देश में सोचा डिग्री काम आएगी यहाँ आप्रवासी को पापड़ बेलने पड़ते हैं खैर किस्सा एक दिन का ऐसा हुआ शनिवार का दिन था गर्मी का मौसम रेस्टोरेंट में पर्यटकों की भीड़ होती थी कमाई भी बहुत हुई थी उस दिन हमारे कॅश ट्रे में अमरीकन डॉलर थे एक ग्राहक को मदत करते वक़्त पीछे से एक हाथ आया कॅश ट्रे पर हमने भी उस हाथ को दबोच लिया उसने झट हाथ में जितने पैसे आये लेकर फरार होने की कोशिश की हम कहाँ जाने देते उसे ऐसे पकड़ लिया राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में पले -बढे हैं यूँही थोड़ी किसी को आसानी से जाने देते जोश में पकड़ तो लिया था चोर को पीछे से ७ फुट का इंसान और उसकी कमीज हमारे हाथ हम सिर्फ ५ फुट ४ इंच के मगर जोश कम न था बहादुरी से चोर को पकड़ा और उसे छोड़ भी दिया ये भारत देश नहीं जहाँ एक...