Posts

Showing posts with the label raahein

रास्तों का सवाल

Image
  रास्ते हैं हर जगह— यहाँ, वहाँ, हर जहाँ, कहीं ऊपर उठते हुए, कहीं नीचे उतरते हुए। आसमान को छूते ये फ्लाईओवर, कितनी तेज़ी से दौड़ते कदम— पर कहाँ जा रहे हैं हम? किन हदों को लांघते, किन सपनों को जोड़ते, इन ऊँचाइयों पर चढ़ते हुए— क्या सच में मंज़िल करीब है? या ये खाली पड़े रास्ते किसी खोई हुई दिशा की ओर बढ़ रहे हैं? कल शायद ये भी न रहें— बमों की गूंज में, सब कुछ जब राख हो जाएगा। इंसान— अपनी ही बनाई दुनिया को ख़ुद ही मिटाता जा रहा है। इतनी मेहनत, इतनी रचना— फिर क्यों? क्या फिर से आदि मानव बनकर जीने की तैयारी है ये? ~ फ़िज़ा

दरअसल राहें बदल गयीं इस करके भी....

Image
चंद राहें संग चले फिर बिछड़ गए  दरअसल राहें  बदल गयीं इस करके भी  चलने वाले संग होकर भी अलग हो गए ! दोस्ती बराबर की थी सही भी शायद  कुछ था जो दूरियों को बीच ले आई  न जाने मचलता गया फिर दिल शायद ! ग़लतियां समझो या हकीकत का आना  निभाना है संग कसम निभाने की खायी  खाने की होती है कसम जो पड़े निभाना ! सोचो तो बहुत कुछ और कुछ भी नहीं  और देखो तो बहुत कुछ है जहाँ में  कलेजों को रखना है साथ निभाना नहीं !  ये दुनिया है सरायघर आना जाना है  कहीं रूह से जुड़े तो कहीं खून से  क्यों लगाव रखना जब आकर जाना है ! ~ फ़िज़ा