Wednesday, January 05, 2022

उसके जाने का ग़म गहरा है

 

जिस बात से डरती थी 

जिस बात से बचना चाहा 

उसी बात को होने का फिर 

एक बहाना ज़िन्दगी को मिला 

कोई प्यार करके प्यार देके 

इस कदर जीत लेता है दिल 

न हम जी पाते हैं उसके बगैर 

मरते हैं पर उसकी हर अदा पर 

ज़िन्दगी जीने का एक बहाना 

जो देती है सभी को हर पल 

उसके जाने का ग़म गहरा है 

जिस कदर वो नस-नस में बसी 

मुश्किल है इस दर्द की हद पाना 

ज़र्रे-ज़र्रे में है यादों का नगीना  

समझ न आये उसके जाने का 

या फिर उसके ज़िंदादिली का 

जश्न मनाएं !?!


~ फ़िज़ा  

Friday, December 31, 2021

हौसला रखना बुलंद


 फिर नया साल आया 

वोही पुराने सिलसिले 

मास्क टीके बूस्टर संग 

उम्मीदों से भरा नया साल 

कोशिश अब भी वही है 

खुश रहो, सतर्क रहो 

नादानी से बचे रहो  

शायद दो हज़ार बाइस 

नयी उमंगों से भरा हो 

नए मौके, नयी ताकत 

स्वस्थ रहे सभी जनवासी  

मगर हौसला रखना बुलंद 

धैर्य साहस और संतुष्टि से 

भरा हो ये नया साल दोस्तों 

बस, कोविड से रहना दूर 

न इसकी दोस्ती अच्छी 

और न ही इसकी दुश्मनी 

अपने और अपनों को रखना 

इस से मेहफ़ूज़ दोस्तों 

दुआ यही है सलामत रहे 

ये आने वाला नया साल 

ख़ुशी से उम्मीदों से भरा 

रहे आप सभी का नया साल !


~ फ़िज़ा 

Thursday, November 04, 2021

दिवाली की शुभकामनाएं आपको भी !


 दशहरे के जाते ही 

दिवाली का इंतज़ार 

जाने क्यों पूनावाली 

छह दिनों की दिवाली 

एक-एक करके आयी 

दीयों से मिठाइयों से 

तो कभी रंगोलियों से 

नए कपड़ों में सजके 

मनाया तो हमने भी 

मगर सोच में हर वक्त 

बचपन की दिवाली 

पठाखे और फुलझड़ियों 

में ही खो सा गया कहीं 

अब तो दिवाली सिर्फ 

दिलों में यादों में और 

चंद लम्हों में क़ैद है 

जाने कब ये रिहा होंगे 

क़ैदख़ानों से !


~ फ़िज़ा 

Wednesday, October 20, 2021

जलियानावलां बाग़ !

 



लोगों की भीड़ थी पार्क में 

जैसे कालीन बिछी ज़मीं पे 

एक ठेला चलाता हुआ दिखा 

जो भर-भर लाशें एक-एक 

कोशिश करता बचाने की 

डॉक्टर ने पुछा और कितने 

सौ से भी ज्यादा कहा वो 

फिर भागा लाश उठाने 

लोगों को बचाने उधम सिंह !

~ फ़िज़ा 

Wednesday, September 22, 2021

सुनियेगा मेरा पॉडकास्ट !


दोस्तों हाल ही में मैंने अपना एक हिंदी में पॉडकास्ट शुरू किया है.  ये पॉडकास्ट मैंने एंकर अप्प के ज़रिये शुरू किया है, जहाँ मैं रोज़ नए-नए, मनचाहे विषयों पर बात करती हूँ - ये है UshaDawn - Hindi Podcast 

ये पॉडकास्ट आप गूगल , एप्पल पॉडकास्ट , और spotify में भी सुन सकते हैं. दर रोज़ मैं पसिफ़िक टाइम सुबह के ३ बजे पब्लिश करती हूँ - आप सुनियेगा ज़रूर !


कुछ खट्टी-मीठी बातें लेकर 

आयी हूँ कुछ वक़्त बिताने 

संग तुम सभी के मिलकर 

जीवन की कुछ विस्मय बातें 

पसंद आये तो संग चलना  

नहीं आये तो कहते जाना 

साझेदारी है मिलकर करना 

प्रतिक्रिया जो भी हो दे देना 

मगर मेरा ये पॉडकास्ट तुम 

ज़रूर सुनना दोस्त हो आखिर !


~ फ़िज़ा

Tuesday, September 14, 2021

मेरी भाषा हिन्दी !


 

मेरे ख्वाब, मेरी सोच,

मेरे बोल, मेरे ख्याल ,

सभी कुछ जेहन में मेरे ,

यूँ सजकर संवरकर हैं,

वो प्रेम हो या क्रोध,

एहसास हो या भावना,

कविता हो या गद्य या 

हो कहानियाँ दिल में 

सभी आते हैं हिंदी में 

आत्मविश्वास जगाता 

हिन्दी भाषा है वो दाता 

मधुर, सरल, सहज है 

बोलने, समझने में है 

बदलती सबकी काया !


~ फ़िज़ा 

हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं !

Wednesday, August 25, 2021

आज कुछ अजब सा देखा


 आज कुछ अजब सा देखा 

बात तो दोनों की सही थी 

दोनों ही अपने पेट वास्ते 

जीवन का नियम संभाले 

एक तो बिल से निकला 

दूजा पेड़ से उड़कर आया 

निकले दोनों पेट की खातिर 

बस एक ही भरपेट खाया 

जीवन का भी खेल देखो 

किसका अंत व शुरुवात 

जो भोजन बना वो नादान 

जिसने खाया वो भी नादाँ 

प्रकृति के कटघरे में सही 

मगर अपने दिल से पूछूं 

तब भी सही लगा मगर 

जाने वालों का अफ़सोस 

तो ज़रूर होता है मन को 

ऐसा ही कुछ हुआ हम को 

जब से देखा हादसे को  !


~ फ़िज़ा 

उसके जाने का ग़म गहरा है

  जिस बात से डरती थी  जिस बात से बचना चाहा  उसी बात को होने का फिर  एक बहाना ज़िन्दगी को मिला  कोई प्यार करके प्यार देके  इस कदर जीत लेता है ...