Thursday, November 04, 2021

दिवाली की शुभकामनाएं आपको भी !


 दशहरे के जाते ही 

दिवाली का इंतज़ार 

जाने क्यों पूनावाली 

छह दिनों की दिवाली 

एक-एक करके आयी 

दीयों से मिठाइयों से 

तो कभी रंगोलियों से 

नए कपड़ों में सजके 

मनाया तो हमने भी 

मगर सोच में हर वक्त 

बचपन की दिवाली 

पठाखे और फुलझड़ियों 

में ही खो सा गया कहीं 

अब तो दिवाली सिर्फ 

दिलों में यादों में और 

चंद लम्हों में क़ैद है 

जाने कब ये रिहा होंगे 

क़ैदख़ानों से !


~ फ़िज़ा 

Wednesday, October 20, 2021

जलियानावलां बाग़ !

 



लोगों की भीड़ थी पार्क में 

जैसे कालीन बिछी ज़मीं पे 

एक ठेला चलाता हुआ दिखा 

जो भर-भर लाशें एक-एक 

कोशिश करता बचाने की 

डॉक्टर ने पुछा और कितने 

सौ से भी ज्यादा कहा वो 

फिर भागा लाश उठाने 

लोगों को बचाने उधम सिंह !

~ फ़िज़ा 

Wednesday, September 22, 2021

सुनियेगा मेरा पॉडकास्ट !


दोस्तों हाल ही में मैंने अपना एक हिंदी में पॉडकास्ट शुरू किया है.  ये पॉडकास्ट मैंने एंकर अप्प के ज़रिये शुरू किया है, जहाँ मैं रोज़ नए-नए, मनचाहे विषयों पर बात करती हूँ - ये है UshaDawn - Hindi Podcast 

ये पॉडकास्ट आप गूगल , एप्पल पॉडकास्ट , और spotify में भी सुन सकते हैं. दर रोज़ मैं पसिफ़िक टाइम सुबह के ३ बजे पब्लिश करती हूँ - आप सुनियेगा ज़रूर !


कुछ खट्टी-मीठी बातें लेकर 

आयी हूँ कुछ वक़्त बिताने 

संग तुम सभी के मिलकर 

जीवन की कुछ विस्मय बातें 

पसंद आये तो संग चलना  

नहीं आये तो कहते जाना 

साझेदारी है मिलकर करना 

प्रतिक्रिया जो भी हो दे देना 

मगर मेरा ये पॉडकास्ट तुम 

ज़रूर सुनना दोस्त हो आखिर !


~ फ़िज़ा

Tuesday, September 14, 2021

मेरी भाषा हिन्दी !


 

मेरे ख्वाब, मेरी सोच,

मेरे बोल, मेरे ख्याल ,

सभी कुछ जेहन में मेरे ,

यूँ सजकर संवरकर हैं,

वो प्रेम हो या क्रोध,

एहसास हो या भावना,

कविता हो या गद्य या 

हो कहानियाँ दिल में 

सभी आते हैं हिंदी में 

आत्मविश्वास जगाता 

हिन्दी भाषा है वो दाता 

मधुर, सरल, सहज है 

बोलने, समझने में है 

बदलती सबकी काया !


~ फ़िज़ा 

हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं !

Wednesday, August 25, 2021

आज कुछ अजब सा देखा


 आज कुछ अजब सा देखा 

बात तो दोनों की सही थी 

दोनों ही अपने पेट वास्ते 

जीवन का नियम संभाले 

एक तो बिल से निकला 

दूजा पेड़ से उड़कर आया 

निकले दोनों पेट की खातिर 

बस एक ही भरपेट खाया 

जीवन का भी खेल देखो 

किसका अंत व शुरुवात 

जो भोजन बना वो नादान 

जिसने खाया वो भी नादाँ 

प्रकृति के कटघरे में सही 

मगर अपने दिल से पूछूं 

तब भी सही लगा मगर 

जाने वालों का अफ़सोस 

तो ज़रूर होता है मन को 

ऐसा ही कुछ हुआ हम को 

जब से देखा हादसे को  !


~ फ़िज़ा 

Sunday, June 20, 2021

पितृ-दिवस की शुभकामनाएं - अच्चा


 

पिता की उंगली पकड़ कर चलना 

ये तो पैदा होते ही सिखाया माँ ने 


उंगली पकड़ते चलते सँभलते हुए 

हर इच्छाएं मेरी पूरी की हमेशा से 


कभी किसी बात से डर भी होता

तो पिता की आड़ में रहकर कहते 


जब कोई बात मनवानी हो माँ को  

पिता के नाम का ही डर जताती वो  


हर-उतार चढाव में ज़िन्दगी के मेरे 

एक हौसला, साथी ढाल बनके रहे 


वो शख्स जिसे सिर्फ याद करने से 

दुनिया भर की खुशियां हौसले मिले 


~ फ़िज़ा 

Friday, June 18, 2021

चाय की चुस्की

 


चाय की पत्ती पानी संग 

कुछ उबाल दूध चीनी का  

ढेर सारा प्यार दोस्ती का 

चाय की चुस्की में मानों 

सुख मिले सारे संसार का   

दोस्ती और चाय के किस्से 

जग-ज़ाहिर हैं कई ज़माने से 

एक चुस्की और गयी थकान 

गुज़रे कई सालों के साथ आयी 

कई किस्से कहानियां बचपन की 

वो अदरक की चाय और प्रशंसा 

चुस्की बाद सभी का दुलार - प्यार

मानों एक लम्बे सफर के बाद का 

ठहराव !!!

~ फ़िज़ा 

दिवाली की शुभकामनाएं आपको भी !

  दशहरे के जाते ही  दिवाली का इंतज़ार  जाने क्यों पूनावाली  छह दिनों की दिवाली  एक-एक करके आयी  दीयों से मिठाइयों से  तो कभी रंगोलियों से  नए...