Posts

ये सुरों का वरदान है..

Image
  साड़ी की लहरों में सजी, सुरों का इक जहान है, हर थाप में धड़कता दिल, जैसे कोई अरमान है। हाथों की हर चोट में, एक लय का बयान है, ढोल की हर गूंज में, छुपा अपना पहचान है। मुस्कान में घुली हुई, रागों की मुस्कान है, हर सुर में बसता जैसे, जीवन का सम्मान है। ये सिर्फ़ ध्वनि नहीं, ये एक पुराना गान है, पीढ़ियों से बहता आया, ये सुरों का वरदान है। हर ताल में सजा हुआ, त्योहारों का सामान है, इस संगीत की धड़कन में, बसता पूरा जहान है। फ़िज़ा कहे इन सुरों में, उसका भी अरमान है, हर थाप में छुपा हुआ, दिल का एक बयान है। ~ फ़िज़ा 

विषु का उत्सव

Image
  सुनहरी सी ये डाल, जैसे विषु का पैगाम है, कोन्ना के फूलों में बसता केरल का हर अरमान है। सुबह की पहली किरण संग, जब ये आँगन में सजता है, हर घर के कण-कण में तब, खुशियों का ऐलान है। कणिक्कोन्ना की छांव तले, विषुक्कणि जब सजे सवेरा, हर पीली पंखुड़ी में छुपा, समृद्धि का सम्मान है। मंदिरों से आती धुन में, इन फूलों की महक घुली, हर थाली, हर आरती में, इनका ही गुणगान है। बचपन की यादों में भी, ये रंग यूँ ही बस जाते हैं, माँ के हाथों सजा वो दृश्य, आज भी दिल की जान है। ये फूल नहीं, ये परंपरा है, पीढ़ियों का अभिमान है, विषु के हर उत्सव में, कोन्ना का ही स्थान है। ~ फ़िज़ा

जन्मदिन मुबारक हो

Image
  मेरी प्यारी रिया, मेरी मुस्कान की वजह, तुम्हारे आने से ही तो रोशन हुई मेरी हर सुबह। तुम्हारी हँसी में बसता है मेरा सारा जहाँ, तुम्हारे हर ख्वाब में छुपा है मेरा अरमान। छोटी-सी उँगली थामे जब तुम चलना सीखी थी, आज वही बेटी मेरी, अपने पंखों से उड़ना सीखी है। हर साल के साथ तुम और भी खिलती जाओ, मेरी दुआ है—तुम्हारी ज़िन्दगी खुशियों से भर जाओ। जन्मदिन मुबारक हो मेरी जान, तुम हमेशा यूँ ही मुस्कुराती रहो—यही है मेरी पहचान। ~ माँ ❤️ ~ फ़िज़ा

ये चाय नहीं, एक रिश्ता है..

Image
  मिट्टी की कुल्हड़ में सजी, ये चाय नहीं एहसास है, पहली चुस्की में जैसे, घर लौट आने का विश्वास है। हल्की-सी भाप में घुली, माँ की रसोई की खुशबू, हर घूँट में मीठी यादें, और थोड़ी-सी बचपन की धूप। सड़क किनारे, ठंडी शाम, या सुबह की नींदी आँखें, ये कुल्हड़ वाली चाय हमेशा, दिल को अपने पास बुला ले। होठों से लगते ही जैसे, सारी थकान पिघल जाए, एक चुस्की और… फिर एक और, मन यूँ ही मुस्कुराए। मिट्टी की सोंधी महक में, छुपा है अपनापन सारा, ये चाय नहीं, एक रिश्ता है, जो हर बार लगे दोबारा। ~ फ़िज़ा

कप में सजी ये छोटी सी दुनिया

Image
  कप में सजी ये छोटी सी दुनिया, झाग में जैसे फूल खिला, हल्की-सी खुशबू कॉफी की, मन को चुपके से छू गई भला। संगमरमर की मेज़ पे रखी, ये प्याली कितनी प्यारी है, जैसे सुबह की पहली किरण, या माँ की मीठी फटकार सी न्यारी है। हर घूँट में है सुकून छुपा, जैसे घर की गर्माहट हो, थोड़ी-सी कड़वाहट भी इसमें, पर उसी में मिठास की आहट हो। पास रखी वो खाली कुर्सी, किसी अपने का इंतज़ार करे, या खुद से मिलने का मौका, कुछ पल दिल को उपहार करे। ये कॉफी नहीं, एक एहसास है, थोड़ा शहर, थोड़ा गाँव है, भागती दुनिया के बीचों-बीच, ये पल ही तो असली ठहराव है। ~ फ़िज़ा

हर दिल अपनी कहानी गाए।

Image
  नीले आसमान की चादर तले, शहर खड़ा है सीना ताने, ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, नदी बहती अपने तराने। शांत जल में झलकती दुनिया, जैसे कोई सपना ठहर गया, लहरों की धीमी सरगोशी में, हर शोर कहीं बिखर गया। किनारों पर खड़ी ये इमारतें, वक़्त की कहानी कहती हैं, भागती ज़िन्दगी के बीच भी, एक ठहराव सा देती हैं। नावें जैसे ख्वाब तैरते, मंज़िल की ओर बढ़ती जाएँ, और ये पुल—रिश्तों सा कोई, दो किनारों को जोड़ते जाएँ। इस शहर में भी एक सुकून है, भीड़ में भी एक तन्हाई, जहाँ हर चेहरा अनजाना, पर हर नज़र में है गहराई। नीले गगन और हरे जल के बीच, ज़िन्दगी यूँ बहती जाए, शहर की इस चुप सी धड़कन में, हर दिल अपनी कहानी गाए। ~ फ़िज़ा

ज़िन्दगी तेरे खेल भी निराले हैं

Image
  ज़िन्दगी भी क्या ज़िन्दगी है, ये कैसा इसका फ़साना है, हर मोड़ पर संग भी देती, फिर तन्हाई का ठिकाना है। दिल को हर किसी से जोड़ दे, ऐसी इसकी रवानी है, पास लाकर फिर सिखाती, दूरी ही असली कहानी है। जीना ही नहीं, जीने की चाह में हमें लालची बना देती, आदत पड़ते ही फिर ये, सबसे गहरी सीख सुना देती है। “अपनी राह खुद ही चुनो, औरों से थोड़ा जुदा रहो,” अकेले आए थे तुम यहाँ, अकेले ही मुस्कुरा के बहो। ये जीवन का खेल निराला, सबके अपने-अपने नियम हैं, यहाँ कोई किसी का सहारा नहीं, बस चलते अपने कदम हैं। उम्मीदों का बोझ न रखना, दिल को हल्का ही रहने दो, सुने कोई तो ठीक, न सुने—तो भी ख़ामोश ही रहने दो। न समझाने में उम्र गँवाओ, न किसी को मनाने में, ज़िन्दगी के रंग निराले हैं, बस खुद को पहचानने में। ज़िन्दगी तेरे खेल भी निराले हैं, हर मोड़ नया अफ़साना है, हर मोड़ पर संग भी देती, फिर तन्हाई का ठिकाना है। ~ फ़िज़ा