Tuesday, September 14, 2021

मेरी भाषा हिन्दी !


 

मेरे ख्वाब, मेरी सोच,

मेरे बोल, मेरे ख्याल ,

सभी कुछ जेहन में मेरे ,

यूँ सजकर संवरकर हैं,

वो प्रेम हो या क्रोध,

एहसास हो या भावना,

कविता हो या गद्य या 

हो कहानियाँ दिल में 

सभी आते हैं हिंदी में 

आत्मविश्वास जगाता 

हिन्दी भाषा है वो दाता 

मधुर, सरल, सहज है 

बोलने, समझने में है 

बदलती सबकी काया !


~ फ़िज़ा 

हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं !

Wednesday, August 25, 2021

आज कुछ अजब सा देखा


 आज कुछ अजब सा देखा 

बात तो दोनों की सही थी 

दोनों ही अपने पेट वास्ते 

जीवन का नियम संभाले 

एक तो बिल से निकला 

दूजा पेड़ से उड़कर आया 

निकले दोनों पेट की खातिर 

बस एक ही भरपेट खाया 

जीवन का भी खेल देखो 

किसका अंत व शुरुवात 

जो भोजन बना वो नादान 

जिसने खाया वो भी नादाँ 

प्रकृति के कटघरे में सही 

मगर अपने दिल से पूछूं 

तब भी सही लगा मगर 

जाने वालों का अफ़सोस 

तो ज़रूर होता है मन को 

ऐसा ही कुछ हुआ हम को 

जब से देखा हादसे को  !


~ फ़िज़ा 

Sunday, June 20, 2021

पितृ-दिवस की शुभकामनाएं - अच्चा


 

पिता की उंगली पकड़ कर चलना 

ये तो पैदा होते ही सिखाया माँ ने 


उंगली पकड़ते चलते सँभलते हुए 

हर इच्छाएं मेरी पूरी की हमेशा से 


कभी किसी बात से डर भी होता

तो पिता की आड़ में रहकर कहते 


जब कोई बात मनवानी हो माँ को  

पिता के नाम का ही डर जताती वो  


हर-उतार चढाव में ज़िन्दगी के मेरे 

एक हौसला, साथी ढाल बनके रहे 


वो शख्स जिसे सिर्फ याद करने से 

दुनिया भर की खुशियां हौसले मिले 


~ फ़िज़ा 

Friday, June 18, 2021

चाय की चुस्की

 


चाय की पत्ती पानी संग 

कुछ उबाल दूध चीनी का  

ढेर सारा प्यार दोस्ती का 

चाय की चुस्की में मानों 

सुख मिले सारे संसार का   

दोस्ती और चाय के किस्से 

जग-ज़ाहिर हैं कई ज़माने से 

एक चुस्की और गयी थकान 

गुज़रे कई सालों के साथ आयी 

कई किस्से कहानियां बचपन की 

वो अदरक की चाय और प्रशंसा 

चुस्की बाद सभी का दुलार - प्यार

मानों एक लम्बे सफर के बाद का 

ठहराव !!!

~ फ़िज़ा 

Friday, May 28, 2021

मोहब्बत करने लगी हूँ


 

फिर गुस्ताखी करने चली हूँ

खुद से मोहब्बत करने लगी हूँ 


चाँद अब मेरा पीछा करता है 

उस मुये से अब मैं छिपती हूँ 


आहें भरते है दोनों तरफ आग 

डरती हूँ  और मिलना भी चाहूँ


दिल ओ दिमाग से मसरूफ हूँ 

गुनगुनाती फ़िज़ा ख्यालों में घूम हूँ 


~ फ़िज़ा 

Thursday, May 13, 2021

दिल या दिमाग ?


 

आज कॉलेज के दोस्तों संग 

यूँही बातों-बातों में दो पक्ष 

दिल व दिमाग की हुई जंग 

दिल तो है ही दीवाना मेरा 

मैंने तो सिर्फ दिल की सुनी 

जो दिमाग के पक्ष में था वो 

दिल से दिमाग कह रहा था 

साथियों के इमदाद से जो 

बहस-मुबाहिसा हुई दोनों में 

क्या कहना उस वक्त का 

उसे भी हराकर बात बढ़ी 

दोस्तों संग फिर कब होंगे 

आमने-सामने पता नहीं 

पर चैटिंग करते दिन पुराने 

कॉलेज के यादों में चला गया 

उम्मीद पर कायम है दुनिया 

और हम तो मिलेंगे फिर से 

जब हो परिहार महामारी का 

शायद तब भी दिल और दिमाग 

की ही जंग में खुल जायेंगे सब 

बचपन के बंधे गिरह दिल के और 

दिमाग के !


~ फ़िज़ा  

Monday, May 10, 2021

गुमशुदा


 

बाहर सुनहरी धुप है 

मौसम भी ठीक है 

दिल कहीं मायूस 

गुमशुदा हो चला है 

कोई बात नहीं पर 

दिल नासाज़ सा है 

इस उदासी की वजह 

ढूंढ़कर भी नहीं मिला 

शायद बोरियत है 

रोज़ वही दिनचर्या 

वही लोग और सब 

वही घर से बाहर 

और बाहर से अंदर 

बस पंछियों पर है 

ध्यान अटका आजकल 

देखा कल ओक पेड़ पे 

दो घोसलों का निवास 

ख़ुशी हुई कितनों को है 

आसरा इस पेड़ से 

अब तो बस उन्हें देखते 

गुज़रता है वक्त सारा 

काम तो व्यस्त रखे 

मगर दिल कहीं खोया है !


~ फ़िज़ा 

मेरी भाषा हिन्दी !

  मेरे ख्वाब, मेरी सोच, मेरे बोल, मेरे ख्याल , सभी कुछ जेहन में मेरे , यूँ सजकर संवरकर हैं, वो प्रेम हो या क्रोध, एहसास हो या भावना, कविता ह...