दीप जलाओ दीप जलाओ आज दिवाली रे !
कोरोना के दिन,महीने निकल गए इनके साथ त्यौहार जन्मदिन भी संभलते बचते-बचाते निकल गए सुना छह दिनों की दिवाली अब के एक-दो दिन ही मनाई गयी इस साल न आना और न ही किसी को बुलाना सभी अपने-अपने संतुष्टि के अनुसार मना रहे होली और ये आयी दिवाली सोशल मीडिया न होता तो त्यौहार भी इस कोरोना की तरह घरों में दब जाती एक बात का पता चल गया इस बार कुछ सजने-संवरने के बहाने ही सही घर की सफाई हुई और चार लालटेन दीयों के कतार रंगोलियों में सजने लगे मिठाइयां घर की न सही हलवाई से ही घरों में रोशन हुए दिवाली के संस्कार यूँही पटाखों की बात अलग है पर्यावरण को सोच समय निर्धारित ही सही मगर फुलझड़ियां खुशिओं के जलाये तो होंगे न इस बार भी? दीप जलाओ -दीप जलाओ आज दिवाली रे उन विषादों से घिरे चंद यादें दीप संग जलाये नए वस्त्र, नए कानों में कुण्डल मगर वो पल कहाँ जब मिट्टी के किले बनाकर राजा, मंत्री घोडा सजाते रंगोली से सजी गद्दी पर महाराज शिवाजी को बैठाते दिवाली तो हम तब मनाते अब सिर्फ रस्म हैं ...