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करना है आरंभ !

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ज़िन्दगी में कुछ हसीन पल  यूँही चले आते हैं बिखेरने   खुशियां ! कभी कुछ सोचकर नहीं  यूँही एक पल में लिया हुआ  फैसला ! वो वक़्त भी आ गया जब  सीखे हुए कला का करना है   प्रदर्शन ! कई भावनायें हैं मन में गुरु दक्षिणा  एवम गुरु के आशीर्वाद से करना है  आरंभ !  ~ फ़िज़ा 

उसके होंठों से

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उसकी तलब या मेरी तड़प समझ लो  उसके होंठों से लगे मेरे होंठ  प्यास या हवस की व्याकुलता  जब मिले, कण-कण से बुझाती तृष्णा  होठों से होकर जुबां से गुज़रते हुए  हलक से जब वो गरमा गरम  गुज़रती है तो वो किसी  कामोन्माद से कम नहीं  ये एहसास सिर्फ अनुभव है  आजमा के देखिये कभी ! ~ फ़िज़ा 

आसमान से गिरे और खजूर पे अटके

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रोते हुए मैं निकली तो थी मगर मस्तिष्क  पहेलियों को सुलझाने की लड़ी खोज रहा था  अब तक मैं ज्यादा लोगों को तो नहीं जानती थी अगर जानती थी तब भी मदत की गुंजाईश कम थी   किसी वजह यमुना को तंग नहीं करना चाहती थी  एक ही नियोक्ता है सो मराठी महिला को फ़ोन लगाया  बड़ी मिन्नत करके कहा मुझे किराये पर कमरा चाहिए  किसी से भी केहा कर मेरे लिए किराये का एक कमरा  कहीं से दिला सकती हैं अपने दोस्तों या अपने ही घर में? मैं किराये के अलावा आपकी बेटी की देखभाल करुँगी  मराठी महिला पहले तो बोलीं के नहीं-नहीं मेरे घर में नहीं  मेरे पति अलग हैं अपनी बेहन का भी यहाँ रहना पसंद नहीं  अपनी सहेली से पूछती हूँ वो किराये पर कमरा देती है देखें  मैंने मिन्नत की देखिएगा पादरी के घर पर रहना मुश्किल है  वो निकाल देंगे या धर्म का ज़ोर देंगे मुझे मेरी सुरक्षा ज़रूरी है  मैं तुम्हारे घर रेहा लूँ किराया तुम्हें दे दूँगी तुमसे जान-पहचान है  मगर उन्होंने मना कर दिया साफ़, उस वक्त गला सूखने को आया  इस उम्मीद में के स...

नयी दुनिया के नए नज़ारे

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बैंक में खाता खुल गया और  चैक किराये का पादरी को दे दिया  चैक लेते वक़्त पादरी ने कहा ये है  येशु की महिमा अपरम्पार प्रेस डा लार्ड ! उसके बाद उन्होंने प्रार्थना करने बुलाया  सारा परिवार था वहां प्रार्थना करने  बाद में अकेले में बुलाकर पादरी ने कहा  मैं भारत के लिए रवाना हो रहा हूँ परसों  तुम्हें वादा करना होगा के इस बीच तुम  दूसरे पादरी के फ़ोन पर वहाँ नहीं जाओगी  मैं हैरान-परेशान के ये विषय अब भी विषय है? खैर मैंने पुछा क्या हुआ पादरी जी ऐसा क्यों? कहने लगे मेरी बीवी बीमार रहती है और वो  ये सदमा बरदाश्त नहीं कर सकती तुम्हें जाना है  तो अभी निकल जाओ न के मेरे जाने के बाद ! मेरा अपना कोई ऐसा इरादा नहीं था और  मैंने तो पहले ही ज़बान भी दी थी के मैं हूँ  फिर ये सवाल क्यों?  पादरी ने कहा जाने से पहले तुमसे ये वादा चाहिए  मैंने भी निवांत होकर लौटने की शुभकामना दी   उसके बाद पादरी काफी ख़ुशी-ख़ुशी भारत गए   यहाँ हम रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी जीने लगे   तब दूसर...

ज़िन्दगी से कोई क्या गिला करे?

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ज़िन्दगी से कोई क्या गिला करे? जब ज़िन्दगी ही कुछ न कर सके  बहती धारा की तरह निकलती है  सरे आम घूम-घाम कर बढ़ती है  और देखो तो ज़िंदगी मझधार में  सीखा देती है अपने और पराये  अपने होते हैं कम होते हैं और  पराये करीब अपने से लगते हैं क्यों ज़िन्दगी ऐसा सब सीखाती  मगर सोचने पर मजबूर करती है  ज़िन्दगी से कोई क्या गिला करे? जब सोचा था नहीं पड़ना है कहीं  झमेलों से बचना है आगे बढ़ना है  जिसे जो चाहे वो ले लेने दो उसे  न भावनाओं में बेहना है किसी के  न ही किसी का उद्धार करना है  अपना जीवन जी लो तो बहुत है  न मुसीबत को मोलना न झेलना  जिनसे भी मिलना मिलनसार रहना  अकेले आये हो अकेले चले जाना  ज़िन्दगी से कोई क्या गिला करे? ~ फ़िज़ा  

डट के रहना निडर होकर नज़रें मिलाना

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हलकी सी ही सही राहत मिली मुझे, गर्दिश में जब हों हमारे सितारे, आँख से आँख मिलाकर जियो प्यारे  लोग बुरे दिनों को याद ज़रूर दिलाएं  मगर आप इन सब से न मुँह मोड़ें  ग़म न कर किसीका जब खुद हादसों से गुज़रे  डट के रहना निडर होकर नज़रें मिलाना  के मौत से ज्यादा क्या गनीमत है और होना ? ~ फ़िज़ा 

भयादोहन !

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उसने सोचा नहीं था ग़लती से पैर रखा था निकालने से पहले उसने नीचे खींच लिया था सोचने में उसे अपनी ग़लती लगी! जिसका फायदा उसने भी उठा लिया था हर बात पर धमकाना हर तरह का डर बसा देना जब तंग आकर निडर हुई तो और बातों से डराना साल गुज़र गए लगा जैसे ज़िन्दगी फँस सी गयी जो भी हुआ आज सांस लेने में खुलासा हुआ ! ~ फ़िज़ा

नगीने में नगीना ...!

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नगीने में नगीना  मेरे दिल में है एक आईना  जो आँखों से देखता है  दिल के किस्से सफीना खुला आसमान है  अमन का चमन है  खुशियों का खज़ाना  बंटोरते सभी यहाँ मोहब्बत का आशियाना  नगीने में नगीना  तेरे दिल में भी है आईना  कभी तो झाँक के देख  उसे भी है कुछ कहना  तनिक तुम्हें समझाना  आँख से आँख मिलाना  प्रीत की खुशबु फैलाना  कभी ख़याल आये बेगाना  तो थोड़ा रुक कर सोचना  नगीने में नगीना  अपने दिल के आईने को देखना ! ~ फ़िज़ा 

जीने की राह है आज़ादी जब ...

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आया तो हर कोई यहाँ बेमर्जी  जैसे सिर्फ काटने कोई सजा  क्यूंकि जाने कितने बेगैरत यहाँ  मिल जाते हैं देने सिर्फ सजा ! औरों को सजा देना, हैं इनकी जीत  औरों की गनीमत है जो सहते हैं  वर्ना कौन यहाँ निभाने वास्ते है  जब आये बेमर्जी तो क्यों सहें  बेवजह रिश्तों के नाम की बलि  चढ़ते -चढ़ाते निकल ही जाना है  काहे नहीं निकल पड़ते आवारा  जीने की राह है आज़ादी जब  तो ज़िंदादिली से जियें और  जो रेहा जाएं रोते -संभलते हौसला देके निकल जाएं !! ~ फ़िज़ा 

ज़िन्दगी जीने का नाम है ...!

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ज़िन्दगी में गर अकेले हो  तो साथ किसी को ले लो  फिर उन्हें साथ रखना न भूलो ! मोहब्बत का दावा करो ज़रूर  फिर मतलबी न बनो  मोहब्बत दावे पर नहीं टिकती ! नज़र रखते हो सब पर गुपचुप   दिखावा एक से प्यार का  हर हसीना को सन्देश भेजा न करो! तालियां बजती हैं दो हाथों से  ये न सोचो की कोई हमेशा मड़रायेगा  हमेशा अपना हाथ बढ़ाये रखो ! ज़िन्दगी जीने का नाम है  न जियो तब भी चलती है  किसी और का जीवन न जियो ! ~ फ़िज़ा 

दरअसल राहें बदल गयीं इस करके भी....

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चंद राहें संग चले फिर बिछड़ गए  दरअसल राहें  बदल गयीं इस करके भी  चलने वाले संग होकर भी अलग हो गए ! दोस्ती बराबर की थी सही भी शायद  कुछ था जो दूरियों को बीच ले आई  न जाने मचलता गया फिर दिल शायद ! ग़लतियां समझो या हकीकत का आना  निभाना है संग कसम निभाने की खायी  खाने की होती है कसम जो पड़े निभाना ! सोचो तो बहुत कुछ और कुछ भी नहीं  और देखो तो बहुत कुछ है जहाँ में  कलेजों को रखना है साथ निभाना नहीं !  ये दुनिया है सरायघर आना जाना है  कहीं रूह से जुड़े तो कहीं खून से  क्यों लगाव रखना जब आकर जाना है ! ~ फ़िज़ा