Posts

Showing posts with the label musafir

वक्त के संग बदलना चाहता हूँ !

Image
  मैं तो इस पल का राही हूँ  इस पल के बाद कहीं और ! एक मेरा वक़्त है आता जब  जकड लेता हूँ उस पल को ! कौन केहता है ये पल मेरा नहीं  मुझे इस पल को जानना है ! नया दौर नयी दिशा सही है मगर  वक्त के संग बदलना चाहता हूँ ! इस पल से इस पल के लोगों से  मैं मिलकर राह बढ़ाना चाहता हूँ ! तुम मुझे अपना सको तो जानूँ दोस्त  मैं हारने वालों में से तो हूँ ही नहीं !!! ~ फ़िज़ा 

तरुवर की माया

Image
  देखता सब है वो मगर नज़र उस पर नहीं  खबर सबकी है उसे जानता कोई भी नहीं ! ख्याल वो सबका रखता उसका कोई नहीं  उसके सहारे फलते मगर नाम उसका नहीं ! सेहता कोई भोगता कोई सच कोई जाने नहीं  मौज करता कोई वो कर्म करता कहता नहीं ! जैसा सभी को दिखता है वो असल में है नहीं  उम्र गुज़री धुप-छाँव में अब कोई पूछता नहीं !!   ~ फ़िज़ा 

ज़िन्दगी के कुछ कदम अकेले

Image
ज़िन्दगी के कुछ कदम अकेले  चले तो हैं अपने बल पे अकेले  कभी डरके,थम के कभी संभलके  सोचा नहीं आगे-पीछे बस चले  तरह-तरह के जगह लोग मिले  हादसों से, हरकतों से सबक मिले  ज़िन्दगी और साथी कौन समझ लिये  वक़्त गुज़रे थम के गुज़रे तो बरसके  ज़िन्दगी हकीकत सलीके से समझे  अपने पराये में फरक करीब से समझे  गुज़रते रहे रास्तों से और वक़्त गुज़रते  किसी से गिला नहीं बाईस साल गुज़रे वक़्त के तकाज़े ने साफ़ दिखलाये  ज़िन्दगी शिकायत की वजह भी न दिये  शुक्रगुज़ार ऐ ज़िन्दगी तेरा और ये रास्ते   कभी न रुकते चाहे हम न साथ चले तेरे  ज़िन्दगी न छोड़े बेशक हम रास्ते बदलें  कभी ज़िन्दगी जियें तो कभी मौत लिए ! ~ फ़िज़ा 

फिरती हूँ आजकल बेहकी-बेहकी

Image
फिरती हूँ आजकल बेहकी-बेहकी   गुमराह रास्तों पर अजनबी-अजनबी  मुस्कुराते चेहरे अनजानी अजनबी सी  क्या पता है क्या ठिकाना इस गली का  पगडंडी से गुज़रती हुयी कतारों सी   जहाँ कई पदचिन्ह पीछा करती हुयी   किसे जाना है और कितनी जल्दी  रास्ते हैं खुली बाँहों की तरह बुलाती  कई मुसाफिर हैं तरंगों को रोकती  कभी इठलाती तो कभी बहलाती  मंज़िल तू है भी कहीं या यूँ ही बहकाती  मुसाफिर हूँ मंज़िल की तलाश में  फिरती हूँ आजकल बेहकी -बेहकी ! ~ फ़िज़ा