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महिला आरक्षण की लौ

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  संसद की दीवारों में गूँजी एक नई सी बात, बराबरी के शब्दों ने छेड़ी फिर से नई शुरुआत। महिला आरक्षण की लौ जली, उम्मीदों का आसमान, पर इसके साये में चलता रहा राजनीति का भी गान। वोटों की गिनती में भी, सपनों का हिसाब हुआ, कभी समर्थन, कभी विरोध—हर रंग का इज़हार हुआ। कागज़ पर लिखे अधिकार, दिल तक कब पहुँचेंगे, ये सवाल अब भी गलियों में धीमे-धीमे गूंजेंगे। नारी की शक्ति कोई नया अध्याय नहीं, वो तो हर दौर में रही—बस पहचान नई। ये बिल एक दरवाज़ा है, मंज़िल नहीं अभी, सफ़र लंबा है आगे, राहें आसान नहीं। सत्ता के गलियारों में चाहे कितनी भी चालें हों, हर आवाज़ के पीछे सच्चाई की मशालें हों। जब नीयत साफ़ होगी, तब बदलाव सच होगा, वरना हर वादा बस एक और शब्द होगा। फिर भी उम्मीदों की डोर थामे चलती नारी, हर संघर्ष में खुद को फिर से लिखती नारी। कानून से आगे बढ़कर जब सोच बदलेगी, तभी ये आज़ादी सच में हर घर तक पहुँचेगी। ~ फ़िज़ा

सुना है इलेक्शन बस एक खेल है !!

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  हर तरफ एक खौफ सा माहौल है  सुना है इलेक्शन का ये सब खेल है  अब तक इतनी उत्तेजना नहीं थी कभी  फिर आज-कल में क्या होगया ऐसा ? सुना है इलेक्शन का ये सब खेल है ! पेहले ये नहीं तो वो पार्टी जीतेगी बस  सब कुछ तो अच्छा ही चल रहा है  एक साल इसे तो दूजे में उसका राज  माहौल तो वोही है जैसे थे वैसे हैं  सुना है इलेक्शन का ये सब खेल है ! ये खौफ क्यों? इलेक्शन ही तो है  किसी ने कहा इस डर की वजह  यहां की जनता ही है जिसने चुना  ट्रम्प, निठल्ला नफरत फैलाने वाला   सुना है इलेक्शन का ये सब खेल है ! डरना तो पड़ेगा अपने हक़ की बात है  किसी बन्दर के हाथ में तलवार देकर   राजा भी खुद की नाक न बचा पाया  डरना क्या, वोट दो जनहित के लिए  कमला को लाओ इलेक्शन तो खेल है ! सुना है इलेक्शन बस एक खेल है !! ~ फ़िज़ा 

चुनाव

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  सुना है आजकल चुनाव चल रहा है  जानकर मैने भी उत्सुकता जताई  किसे वोट दीजियेगा इस बार आपने  जानते थे के बापू के समर्थक रहे हमेशा  इस बार किसे वोट देने का इरादा है ? जवाब कुछ इस तरह से आया वहां से  वोट  कोई पार्टी नहीं हम किसी पार्टी के नहीं  अब तक जिसने सब ख्याल रखा हमारा  बिजली पानी और सड़क घर तक लाया  साफ़ सुथरे अस्पताल तो दवाइयाँ मुफ्त  हर मांग पूरी करने वाले को ही वोट देंगे  ढोंग रचाने आएंगे बहुत देंगे कई झांसे  फंसना न मगर अस्थायी एहसानो पर  अब तक जिसने संभाल रखा लोगों को  निस्वार्थ जरूरतें पूरी कर नेतृत्व संभाला  क्यों न मोहर उसी पर लगे इस बार भी  चुनकर लाओ अपना वही मुख्या मंत्री ! ~ फ़िज़ा