Saturday, February 25, 2023

चैरिटी का चादर


 चैरिटी का नाम कुछ इस तरह 

इस्तेमाल करते हैं हर जगह 

मानों कोई एहसान जिस तरह 

मदत की उम्मीद करते है कभी 

दिलदार समझ कर ही आते हैं 

देने वाले का गुरुर जब देखते है 

चैरिटी का ओढ़ा चादर उससे 

निकलकर नंगा कर देता है 

कभी पैसा अँधा करता है

हर कहीं पैसे का शोशा है 

अमीर गरीब का खेला है !


~ फ़िज़ा 

Monday, February 20, 2023

उसके होंठों से


उसकी तलब या मेरी तड़प समझ लो 

उसके होंठों से लगे मेरे होंठ 

प्यास या हवस की व्याकुलता 

जब मिले, कण-कण से बुझाती तृष्णा 

होठों से होकर जुबां से गुज़रते हुए 

हलक से जब वो गरमा गरम 

गुज़रती है तो वो किसी 

कामोन्माद से कम नहीं 

ये एहसास सिर्फ अनुभव है 

आजमा के देखिये कभी !


~ फ़िज़ा 

जाने क्या हुआ है

  आजकल में जाने क्या हुआ है  पन्द्रा -सोलवां सा हाल हुआ है  जाने कैसे चंचल ये मन हुआ है  बरसात की बूंदों सा थिरकता है  कहीं एक गीत गुनगुनाता...