हर दिल अपनी कहानी गाए।


 

नीले आसमान की चादर तले,
शहर खड़ा है सीना ताने,
ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच,
नदी बहती अपने तराने।

शांत जल में झलकती दुनिया,
जैसे कोई सपना ठहर गया,
लहरों की धीमी सरगोशी में,
हर शोर कहीं बिखर गया।

किनारों पर खड़ी ये इमारतें,
वक़्त की कहानी कहती हैं,
भागती ज़िन्दगी के बीच भी,
एक ठहराव सा देती हैं।

नावें जैसे ख्वाब तैरते,
मंज़िल की ओर बढ़ती जाएँ,
और ये पुल—रिश्तों सा कोई,
दो किनारों को जोड़ते जाएँ।

इस शहर में भी एक सुकून है,
भीड़ में भी एक तन्हाई,
जहाँ हर चेहरा अनजाना,
पर हर नज़र में है गहराई।

नीले गगन और हरे जल के बीच,
ज़िन्दगी यूँ बहती जाए,
शहर की इस चुप सी धड़कन में,
हर दिल अपनी कहानी गाए।

~ फ़िज़ा

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