नन्हा सा माली...
नन्हा सा माली बना, मुस्कुराता ये जनाब है,
हाथों में गुलाबी पानी, क्या प्यारा इसका ख़्वाब है।
गमले की छोटी दुनिया में, हरियाली का इंतज़ाम है,
खुद तो है खिलौना मगर, पौधों से बड़ा लगाव है।
चेहरे पे मासूमियत, जैसे कोई भोला जवाब है,
पानी कम हो या ज़्यादा—बस दिल से पूरा हिसाब है।
पत्थरों के बीच भी इसने, हरा सा जहाँ बसाया है,
लगता है इस छोटे दिल में, बाग़ों का पूरा किताब है।
फ़िज़ा भी देख मुस्काए, ये कैसी मीठी आदत है,
इतना छोटा माली फिर भी, बाग़बानी में नवाब है।
~ फ़िज़ा

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