ये सुरों का वरदान है..


 

साड़ी की लहरों में सजी, सुरों का इक जहान है,
हर थाप में धड़कता दिल, जैसे कोई अरमान है।

हाथों की हर चोट में, एक लय का बयान है,
ढोल की हर गूंज में, छुपा अपना पहचान है।

मुस्कान में घुली हुई, रागों की मुस्कान है,
हर सुर में बसता जैसे, जीवन का सम्मान है।

ये सिर्फ़ ध्वनि नहीं, ये एक पुराना गान है,
पीढ़ियों से बहता आया, ये सुरों का वरदान है।

हर ताल में सजा हुआ, त्योहारों का सामान है,
इस संगीत की धड़कन में, बसता पूरा जहान है।

फ़िज़ा कहे इन सुरों में, उसका भी अरमान है,
हर थाप में छुपा हुआ, दिल का एक बयान है।

~ फ़िज़ा 

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