ये केक नहीं


 

लाल मखमली सी परतों में,
छुपी कोई मीठी दास्तान है,
हर तह में जैसे प्यार सजा,
हर कौर में छोटा अरमान है।

सफेद क्रीम की नरम चादर,
जैसे बादल धरती छू आए,
थोड़ी शरारत, थोड़ी मिठास,
दिल को बच्चे सा बहलाए।

कटते ही खुलते राज कई,
परतों में यादें मुस्काती हैं,
कुछ मीठे लम्हे, कुछ हँसती बातें,
हर टुकड़े में जगमगाती हैं।

ये केक नहीं बस स्वाद भर,
जश्नों की प्यारी पहचान है,
ज़िन्दगी भी शायद ऐसी ही—
थोड़ी परतदार, पर मेहरबान है।

~ फ़िज़ा

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