हमेशा मुस्कुराती रहें।
(09-08-1933 - 04-11-2026)
गीतों की मल्लिका आज खामोश सी हो गई,
सुरों की वो रानी जैसे कहीं खो गई।
जो हर दिल को छूती थी, हर एहसास जगाती थी,
दुःख-सुख, हँसी-खुशी में, अपनी आवाज़ से सहलाती थी—
आज वही धड़कन जैसे थम सी गई।
जिसकी तान पर दुनिया झूमती रही बरसों,
जिसकी नकल में भी लोग ढूँढते थे सरगमों के किस्सों,
कॉमेडी के रंग में भी जिसकी गूँज थी शामिल,
वो अनोखी आवाज़ आज हो गई है ख़ामोश, बेहद ग़मगीन।
आशा ताई, आपका यूँ चले जाना दिल को चीर गया,
बचपन से लेकर आज तक, हर पल आपने ही तो घेर लिया।
आपकी आवाज़ ने हमें थामा, सँवारा, सहारा दिया,
हर मोड़ पर, हर दौर में, जीने का एक सहारा दिया।
आज बस वही आवाज़ है, जो हवाओं में गूँजती रहेगी,
अजर-अमर बनकर हर दिल में यूँ ही बसती रहेगी।
ये दुनिया है—यहाँ बिछड़ना तो हर किसी की कहानी है,
एक-एक कर सबको जाना है, यही जीवन की रवानी है।
पर दुआ है दिल से—जहाँ भी हों आप, सुकून में रहें,
अपने सुरों की दुनिया में, हमेशा मुस्कुराती रहें।
~ फ़िज़ा

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