ये पकोड़ों की महफ़िल
कुरकुरी सी हर अदा में, स्वाद का ऐलान है,
ये पकोड़ों की महफ़िल भी क्या ग़ज़ब मेहमान है।
मसालों की चादरों में लिपटा हर इक जज़्बात है,
हर निवाले में छुपा जैसे दिल का अरमान है।
अदरक की वो खुशबुएँ, हरी धनिया का साथ भी,
इस सुनहरी थाल में मौसम बड़ा जवान है।
चाय की प्याली मिले तो बात कुछ और ही बने,
वरना ये तन्हा मज़ा भी अपने आप में शान है।
फ़िज़ा कहे—ये स्वाद भी छोटी खुशी का जश्न है,
ज़िन्दगी की भागदौड़ में ये सुकूँ की दास्तान है।
~ फ़िज़ा

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