Monday, April 19, 2021

मोहब्बत ज़िंदा रहती है


 

उम्र गुज़र रही थी वक़्त के साथ साँझा कर रहे थे 

तीस साल गुज़रा हुआ पल उठके सामने आगया 


कहीं से कोई उम्मीद या खबर उन दिनों की नहीं थी 

तस्वीरों से यादों के लड़ियों से वो पल याद दिलाये 


न उसने हमसे कहा और अनजान हम थे  आज तक

कोई दिल ही दिल में हम से मोहब्बत कर रहा था 


हर अदा पर वो थे फ़िदा मगर हिम्मत न थी कहने की 

शर्म-लाज दोनों तरफ थी और बात दिल में ही रह गयी 


वक़्त के साथ सबकुछ बदलता है प्रकृति का नियम है 

फिर भी दिल में उस मोहब्बत को लिए घूमना अब तक 


सही दीवानगी है 'फ़िज़ा' किस अनजानेपन की है सजा 

मोहब्बत ज़िंदा रहती है मगर ये सही हो, ये ज़रूरी नहीं !


~ फ़िज़ा 

5 comments:

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा said...

सुन्दर रचना।।।।।।

अनीता सैनी said...

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (२१-०४-२०२१) को 'प्रेम में होना' (चर्चा अंक ४०४३) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

Kamini Sinha said...

न उसने हमसे कहा और अनजान हम थे आज तक

कोई दिल ही दिल में हम से मोहब्बत कर रहा था

वाह !! बहुत खूब ,सादर नमन आपको

Onkar said...

सुन्दर रचना

Dawn said...

@पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा ji aapka behad shukriya meri rachna ko sarahane ke liye, abhar!

@अनीता सैनी ji shukriya meri rachana ko apne sankalan mein shamil karne ke liye, Abhar!

@Kamini Sinha ji: Shukriya rachana ko pasand kar daad dene ke liye, mohabbat cheez hi aisee hai :D Abhar!

@Onkar Ji, aapka shukriya meri rachana ko sarahane ke liye, dhanyawaad. Abhar!

ख़ुशी

ज़िन्दगी के मायने कुछ यूँ समझ आये  अपने जो भी थे सब पराये  नज़र आये सफर ही में हैं और रास्ते कुछ ऐसे आये  रास्ते में हर किसी को मनाना नहीं आया...