Posts

मुझे घुटन हो रही है ..!

Image
मुझे घुटन हो रही है  मैं सांस नहीं ले पा रहा हूँ  मुझे तकलीफ हो रही है ! ये सुनकर भी ऐसा क्या  घृणा और ग़ुस्सा होगा  उस इंसान में  जो के अपने घुटने  उसके गले से बिना हटाए  ज़ोर लगता रहा  तब तक  जब तक उसकी सांसें  ख़त्म नहीं होतीं ! मुझे घुटन हो रही है  ये सब देखकर  किस ज़माने में हूँ  मैं ! कहाँ पुरातन काल में  सुना था बुज़र्गों से  तो इतिहास की  कक्षा में और  ये उम्मीद थी के  कलयुग में सब कुछ  अच्छा होगा  न्याय होगा  भेदभाव न होगा  जाती-धर्म का  बंधन घर तक सिमित होगा  पर किसी के साथ  अन्याय न होगा  आज मुझे घुटन हो रही है  ये किस ओर मानव-जाती  बढ़ रही है  क्यों एक दूसरे के  खून के प्यासे हो  चली है ! मेरा दम घुटता है  ये सोचकर के  #गेओर्गेफ्लॉयड  की सांस घोटकर  उसकी जान ले ली  और कानून के रक्षक  ये सब कर रहे थे और...

बचपन जवानी मिले एक दूसरे से...

Image
मेरा बचपन याद आता है इस जगह  वही पहाड़ वही वादियां वही राह  वही पंछी झरना और वही राग  खुश हो जाता है मन इन्हीं सबसे  जब बचपन जवानी मिले एक दूसरे से ! कितने अच्छे थे वो दिन सब सादगी में  जलते सब थे मगर रहते थे अपनी धुन में  छोटी-मोटी चाह हर किसी के दिल में  रहते थे अपने दायरे और फासलों में  थी ही कितनी बड़ी वो दुनिया छोटी सी ! कम में भी एक सुकून सा था जीने का  फ़िक्र थी भी तो इतना नहीं जीने का  एक-दूसरे की क़द्र थी दिल से मुहब्बत का  आजकल आडंबरी हैं अपने और अपनों का  अपनी हस्ती का बवाल मचा रखा हर तरफ का ! ~ फ़िज़ा 

ज़िन्दगी यही है और कुछ भी नहीं...

Image
खुद  में जब कोई खामियां है  ये जानलो तो लुटा दो सब कुछ  उन खामियों को बदलने में  ऐसा ही कुछ हुआ था मेरे संग  जब टेलीमार्केटिंग में औरों के मुकाबले मैं कम थी परिश्रम से  एक अच्छी बिक्री प्रतिनिधि बनी  जहाँ मेरी नौकरी ४ बजे से ११ थी  वहीं मुझे दो-तीन और काम मिले  अब मैं सुबह ८ बजे से ११ बजे तक  काम ही काम, अलग-अलग उत्पाद  उत्पाद में विश्वास हो तो काम आसान  हर उत्पाद बिकने लगा वो भी तादाद में  शायद मेरे ख्वाब में भी न सोचा हो मैंने  क्रेडिट कार्ड से लेकर बीमा तो बिजली  लम्बी दुरी पर फ़ोन करने के पैकेज  ये चीज़ें कोई खरीदेगा? वो भी फ़ोन पर? ताज़्ज़ुब की बात है मगर सही कहा है  दिल से दिल को राह होती है सही में ! एक मजले से दूसरे मजला और फिर  सारे ऑफिस में मैं जानी-पहचानी हुई  कई दोस्त बने कई प्रशंसक भी हुए  कितनों ने दिल दिए और कितने टूटे  कामियाबी खुशियां लाती हैं मोहब्बत भी  ज्यादा की उम्मीद तब भी नहीं थी  ज़िन्दगी ज़िंदाद...

मेरा पहला अनुभव था !

Image
ज़िन्दगी अकेले जीने के मज़े अलग हैं  जहाँ मौज समझते हैं वहीँ मायूसी भी  लेकिन अगर अपना लक्ष्य साध लो  फिर कोई तुम्हें नहीं रोक-टोक सकेगा  मेरा लक्ष्य यहाँ तात्कालिक ठहरना था  कॉल सेण्टर में सेल्स में ध्यान देना था  प्रशिक्षण को गंभीरता से लिया और उत्पाद को बेचना है उसे बेहतर जाना  उसके फायदे को समझ अपने लिए सोचा  एक बात अपने बारे में ये तैय थी  अगर दिल को भा गया उत्पाद तो फिर  किसी को भी बेचने में मुश्किल नहीं होती  मैंने इसी तरह दिल से बेचे वो सारे उत्पाद  जहाँ कभी भी बेचने का हौसला नहीं था  वहीं दर्जनों के हिसाब से मैंने उत्पाद बेचे  मेरी नौकरी अजीब थी बेचना काम था  मगर शाम ४ बजे  ११ बजे तक रात के  लोगों के घर पहुँचती जहाँ अभी ९ न बजे हों  दर-दर जाकर सेल्स करते सुना था देखा भी  मगर फ़ोन पर टेलीमार्केटिंग करते हुए ये  मेरा पहला अनुभव था ! ~ फ़िज़ा 

समायोजित करलो !

Image
प्रशिक्षण जिस तरह से दिया गया  उस से लगा कुछ बिक्री करना है  मेरी परिस्तिथि ऐसी भी नहीं थी   मना करके निकल जाऊँ वहां से  कभी-कभी लगता है वो अहंकार है  मेरे लिए कोई और चारा भी नहीं था  पढ़ाई यहाँ महंगी है बहुत ये जाना  नसीब से सीखने मिला सीख लिया  बात तय थी जहाँ से भी हो सीख लो  उपयोग हर स्तिथि पर काम आएगा  दो दिन के कठिन प्रशिक्षण के बाद  हमसे कहा गया अपनी जान डाल तो  कॉल सेण्टर में बिक्री करने के लिए  जब हर कोई हमें राय दे रहे थे के सेल्स  की नौकरी  करलो अंग्रेजी अच्छी बोलती हो  तब पसीने छूटते थे, अब भी कम नहीं था  अब तक ऑफिस के कपड़ों की ज़रुरत नहीं थी  रेस्टोरेंट में वहां का यूनिफार्म था एप्रन था  यहाँ तो रोज़ अच्छे सलीके से प्रोफेशनल होना है  मराठी महिला से हमने अपनी दुविधा कही  वो हमें लेकर गयी गुडविल की दुकान में  यहाँ कपडे दान देते हैं फिर उसे बेचा जाता है  कुछ एकाध कपडे खरीदे दफ्तर के लिए  इन सब से महिला खुश नही...

औरत को कौन जान पाया है?

Image
औरत को कौन जान पाया है? खुद औरत, औरत का न जान पायी  हर किसी को ये एक देखने और  छुने की वस्तु मात्र है तभी तो  हर कोई उसके बाहरी खूबसूरती  को ही निहारता है या फिर  नुख्स निकालता है ! औरत को कौन जान पाया है? खुद औरत, औरत का न जान पायी ! उसके पैदा होने से लेकर  उसकी खूसबसुरति और नियति  दोनों का ही भविष्य निर्धारित है  या तो बहुतों के दिल जलायेगी  या फिर खुद किसी दिन जल जाएगी ! औरत को कौन जान पाया है? खुद औरत, औरत का न जान पायी ! उसके लड़कपन पहुँचने तक उसकी  ज़िन्दगी हॉर्मोन्स की चपेट में आ जाता है  उसकी खूबसूरती का अनुमान फिर लगाया जाता है  उसके मुहांसे, उसका कद, उसका शरीर उसके लिए  एक मापने का यन्त्र बन जाता है  औरत को कौन जान पाया है? खुद औरत, औरत का न जान पायी ! लड़कपन से कब जवानी आयी और गयी  उसके तो हाथ भी पीले कर दिए और  अब वो दो-चार बच्चों की माँ बन गयी  तब भी बाहरी खूबसूरती की ही चर्चा रही  उसके हॉर्मोन्स उसका पीछा नहीं छोड़ पायी  ...

ज़िन्दगी में जोखिम तो उठाना पड़ता है ....

Image
मेरे इन सभी प्रयासों और जूझने में  कभी किसी का भी प्रोत्साहन नहीं था  हर कोई कहता केशियर की नौकरी जाने न देना रेस्टोरेंट में खाना तो है  या तो लोग जो है उसमें खुश हैं नहीं तो फिर कोशिश से ही डरते हैं  मेरी मुसीबत मेरी बोरियत तो थी ही  मगर पढ़ाई करके उसके अनुसार  नौकरी नहीं तो फिर क्या चुनौती  क्या नया कुछ सीखना या सीखाना  ज़िन्दगी दूभर लगने लगी और मायूस  अपने आपको चुनौती देना जोखिम उठाना  ज़िन्दगी को रोज़ नए सिरे से महसूस करना  शायद मेरे लिए ऐसा जोखिम उठाना ज़िन्दगी है  महिला संग अच्छे - बुरे सब दिन बीते  फिर वो दिन भी आया जब महिला को  हमारे भविष्य उन्मुख होने पर नाराज़गी  कुल मिलाके साढ़े तीन महीनों के बाद  महिला ने अपना घर देखने के लिए कहा यहाँ तक की खुद हमें एक जगह ले गयीं  घर किराये पर लेने के लिए २०० डॉलर दिए  महिला को यकीन नहीं था हम निकालेंगे  एक तो नौकरी ऐसी के न्यूनतम तनख्वा  ऊपर से २०० डॉलर लेकर भाग गए वो  फ़ोन लगाकर देखा...