Monday, November 09, 2015

पतझड़ में गिरा पत्ता...!


पतझड़ में गिरा पत्ता 
वो भी गीला 
हर हाल से भी  
रहा वो  नकारा 
न रहा वृक्ष का 
न ही किसी काम का 
बस जाना है धूल में 
धरती की गोद में 
जी के न काम आये 
तो क्या मरके खाद बन जायेंगे !

~ फ़िज़ा 

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ख़ुशी

ज़िन्दगी के मायने कुछ यूँ समझ आये  अपने जो भी थे सब पराये  नज़र आये सफर ही में हैं और रास्ते कुछ ऐसे आये  रास्ते में हर किसी को मनाना नहीं आया...