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दिवाली की शुभकामनाएं आपको भी !

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  दशहरे के जाते ही  दिवाली का इंतज़ार  जाने क्यों पूनावाली  छह दिनों की दिवाली  एक-एक करके आयी  दीयों से मिठाइयों से  तो कभी रंगोलियों से  नए कपड़ों में सजके  मनाया तो हमने भी  मगर सोच में हर वक्त  बचपन की दिवाली  पठाखे और फुलझड़ियों  में ही खो सा गया कहीं  अब तो दिवाली सिर्फ  दिलों में यादों में और  चंद लम्हों में क़ैद है  जाने कब ये रिहा होंगे  क़ैदख़ानों से ! ~ फ़िज़ा 

जलियानावलां बाग़ !

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  लोगों की भीड़ थी पार्क में  जैसे कालीन बिछी ज़मीं पे  एक ठेला चलाता हुआ दिखा  जो भर-भर लाशें एक-एक  कोशिश करता बचाने की  डॉक्टर ने पुछा और कितने  सौ से भी ज्यादा कहा वो  फिर भागा लाश उठाने  लोगों को बचाने उधम सिंह ! ~ फ़िज़ा 

सुनियेगा मेरा पॉडकास्ट !

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दोस्तों हाल ही में मैंने अपना एक हिंदी में पॉडकास्ट शुरू किया है.  ये पॉडकास्ट मैंने एंकर अप्प के ज़रिये शुरू किया है, जहाँ मैं रोज़ नए-नए, मनचाहे विषयों पर बात करती हूँ - ये है UshaDawn - Hindi Podcast   ये पॉडकास्ट आप गूगल , एप्पल पॉडकास्ट , और spotify में भी सुन सकते हैं. दर रोज़ मैं पसिफ़िक टाइम सुबह के ३ बजे पब्लिश करती हूँ - आप सुनियेगा ज़रूर ! कुछ खट्टी-मीठी बातें लेकर  आयी हूँ कुछ वक़्त बिताने  संग तुम सभी के मिलकर  जीवन की कुछ विस्मय बातें  पसंद आये तो संग चलना   नहीं आये तो कहते जाना  साझेदारी है मिलकर करना  प्रतिक्रिया जो भी हो दे देना  मगर मेरा ये पॉडकास्ट तुम  ज़रूर सुनना दोस्त हो आखिर ! ~ फ़िज़ा

मेरी भाषा हिन्दी !

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  मेरे ख्वाब, मेरी सोच, मेरे बोल, मेरे ख्याल , सभी कुछ जेहन में मेरे , यूँ सजकर संवरकर हैं, वो प्रेम हो या क्रोध, एहसास हो या भावना, कविता हो या गद्य या  हो कहानियाँ दिल में  सभी आते हैं हिंदी में  आत्मविश्वास जगाता  हिन्दी भाषा है वो दाता  मधुर, सरल, सहज है  बोलने, समझने में है  बदलती सबकी काया ! ~ फ़िज़ा  हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं !

आज कुछ अजब सा देखा

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  आज कुछ अजब सा देखा  बात तो दोनों की सही थी  दोनों ही अपने पेट वास्ते  जीवन का नियम संभाले  एक तो बिल से निकला  दूजा पेड़ से उड़कर आया  निकले दोनों पेट की खातिर  बस एक ही भरपेट खाया  जीवन का भी खेल देखो  किसका अंत व शुरुवात  जो भोजन बना वो नादान  जिसने खाया वो भी नादाँ  प्रकृति के कटघरे में सही  मगर अपने दिल से पूछूं  तब भी सही लगा मगर  जाने वालों का अफ़सोस  तो ज़रूर होता है मन को  ऐसा ही कुछ हुआ हम को  जब से देखा हादसे को  ! ~ फ़िज़ा 

पितृ-दिवस की शुभकामनाएं - अच्चा

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  पिता की उंगली पकड़ कर चलना  ये तो पैदा होते ही सिखाया माँ ने  उंगली पकड़ते चलते सँभलते हुए  हर इच्छाएं मेरी पूरी की हमेशा से  कभी किसी बात से डर भी होता तो पिता की आड़ में रहकर कहते  जब कोई बात मनवानी हो माँ को   पिता के नाम का ही डर जताती वो   हर-उतार चढाव में ज़िन्दगी के मेरे  एक हौसला, साथी ढाल बनके रहे  वो शख्स जिसे सिर्फ याद करने से  दुनिया भर की खुशियां हौसले मिले  ~ फ़िज़ा 

चाय की चुस्की

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  चाय की पत्ती पानी संग  कुछ उबाल दूध चीनी का   ढेर सारा प्यार दोस्ती का  चाय की चुस्की में मानों  सुख मिले सारे संसार का    दोस्ती और चाय के किस्से  जग-ज़ाहिर हैं कई ज़माने से  एक चुस्की और गयी थकान  गुज़रे कई सालों के साथ आयी  कई किस्से कहानियां बचपन की  वो अदरक की चाय और प्रशंसा  चुस्की बाद सभी का दुलार - प्यार मानों एक लम्बे सफर के बाद का  ठहराव !!! ~ फ़िज़ा