Monday, May 10, 2021

गुमशुदा


 

बाहर सुनहरी धुप है 

मौसम भी ठीक है 

दिल कहीं मायूस 

गुमशुदा हो चला है 

कोई बात नहीं पर 

दिल नासाज़ सा है 

इस उदासी की वजह 

ढूंढ़कर भी नहीं मिला 

शायद बोरियत है 

रोज़ वही दिनचर्या 

वही लोग और सब 

वही घर से बाहर 

और बाहर से अंदर 

बस पंछियों पर है 

ध्यान अटका आजकल 

देखा कल ओक पेड़ पे 

दो घोसलों का निवास 

ख़ुशी हुई कितनों को है 

आसरा इस पेड़ से 

अब तो बस उन्हें देखते 

गुज़रता है वक्त सारा 

काम तो व्यस्त रखे 

मगर दिल कहीं खोया है !


~ फ़िज़ा 

3 comments:

अनीता सैनी said...

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (११ -०५ -२०२१) को 'कुछ दिनों के लिए टीवी पर बंद कर दीजिए'(चर्चा अंक ४०६३) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

Manisha Goswami said...

बिलकुल सही उदासी की वजह अक्सर बोरियत होती है
सुंदर रचना

SANDEEP KUMAR SHARMA said...

देखा कल ओक पेड़ पे

दो घोसलों का निवास

ख़ुशी हुई कितनों को है

आसरा इस पेड़ से

अब तो बस उन्हें देखते

गुज़रता है वक्त सारा

काम तो व्यस्त रखे

मगर दिल कहीं खोया है ! बहुत खूब

दिल की मर्ज़ी

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