बशीर बद्र साहब को श्रद्धांजलि 🤲💐🤲



आज अल्फ़ाज़ उदास हैं, ग़ज़लें ख़ामोश हैं और शायरी की महफ़िल एक अज़ीम फ़नकार के बिछड़ जाने का मातम मना रही है।
बशीर बद्र साहब सिर्फ़ एक शायर नहीं थे, वे एहसासों के तर्जुमान थे। उन्होंने मोहब्बत को लफ़्ज़ दिए, जुदाई को आवाज़ दी और इंसानी रिश्तों की नाज़ुकियों को ऐसी सादगी से बयां किया कि हर दिल को अपनी कहानी उनमें नज़र आई।
उनके शेर किताबों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोगों की ज़िंदगी, बातचीत और यादों का हिस्सा बन गए। दर्द को उन्होंने कभी शिकायत नहीं बनाया, बल्कि उसे ख़ूबसूरत शायरी में ढालकर दुनिया को सौंप दिया।
आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तब भी उनकी आवाज़ उनके अशआर में गूंजती रहेगी। उनकी शायरी हमें याद दिलाती रहेगी कि लफ़्ज़ मरते नहीं, वे लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहते हैं।

"दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों।"

अलविदा बशीर बद्र साहब।
आप चले गए, मगर आपकी शायरी हमेशा हमारी रूहों में उजाला करती रहेगी।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

~ फ़िज़ा

Comments

आनन्द" पर सोमवार 01जून 2026 को लिंक की गयी है....

http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

!
"आनन्द" = पाँच लिंकों का आनन्द
भावभीनी श्रद्धांजलि बशीर सहाब को,

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में।
Admin said…
बशीर बद्र साहब का जाना सच में दिल दुखाने वाली खबर है। उन्होंने बहुत आसान और खूबसूरत शब्दों में जिंदगी, प्यार और रिश्तों की बातें कही। उनके शेर हर उम्र के लोगों के दिल को छूते हैं, क्योंकि उनमें हमारी अपनी जिंदगी की झलक मिलती है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.

अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद

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