मुस्कुराते रहो तुम यूँ ही जीवन भर !

 


कभी हाथों में समा जाते थे तुम नन्हे से हर रास्ते,

आज गोद में भी न समाओ — बड़े हो गए हर रास्ते।


माँ का दिल तब भी धड़कता था फ़िक्र के साये में,

कहीं भूल न हो जाए मुझसे इस डर में हर रास्ते।


मुत्तासी हँसकर कहती थी मेरी चिंता सुनकर,

“बच्चे एक से ही होते हैं दुनिया में हर रास्ते।”


सबसे छोटे थे तुम घर के प्यारे आँगन में,

लाड़-प्यार भी बरसा तुम पर खुलकर हर रास्ते।


पर तुमने कभी उस स्नेह का अभिमान न किया,

सादगी ही रही तुम्हारे स्वभाव में हर रास्ते।


खुश रहो सदा, किसी को दुःख न देना जीवन में,

इंसानियत का हाथ बढ़ाना तुम भी हर रास्ते।


'फ़िज़ा' की दुआ है माँ के दिल की गहराइयों से,

मुस्कुराते रहो तुम यूँ ही जीवन भर हर रास्ते।


~ फ़िज़ा 

Comments

ह्रदयस्पर्शी । अभिनंदन ।
Dawn said…
Sushil Kumar ji aapka behad shukriya, abhar!
Dawn said…
Nupooram ji behad shukriya aapka aur dhanyawaad - abhar!

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