Saturday, July 18, 2020

करें मुस्तकबिल बगावत का ...!




चलती तो हूँ मैं सीना तानकर 
मगर दिल में अब भी है वो डर 
कहीं खानी न पड़ जाए ठोकर 
दर ब दर !
क्यों न इस पल के हम हो जाएं 
शुक्रगुज़ार, जी लें उस पल को 
क्यों ख्वामखा करती है परेशान 
किसी अनहोनी का !
न तो जी भर के खुश भी हो सकें 
न ही ग़मगीन हों उस बात की जो 
अभी हुआ नहीं हैं बस फिर भी 
लगा रहता है डर !
आँखों के सामने अनीति नज़र आती है 
सर पे है हाथ किसी का जो करे मनमानी 
सोचते रेह जाते हैं क्या सिर्फ देखें ये सब 
या करें मुस्तकबिल बगावत का !

~ फ़िज़ा 

4 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

वाह

Dawn said...

आपका बहुत बहुत शुक्रिया !

अनीता सैनी said...

वाह !बहुत सुंदर

Dawn said...

@अनीता सैनी : आपका बहुत बहुत शुक्रिया !

कोवीड इस अचूक से आ मिला !

 सकारात्मक  होना क्या इतना बुरा है ? के कोवीड भी इस अचूक से आ मिला  जैसे ही हल्ला हुआ के मेहमान आये है  नयी दुल्हन की तरह कमरे में बंद हो गय...