First we build the tools, then they build us :-(
कप में सजी ये छोटी सी दुनिया
कप में सजी ये छोटी सी दुनिया, झाग में जैसे फूल खिला, हल्की-सी खुशबू कॉफी की, मन को चुपके से छू गई भला। संगमरमर की मेज़ पे रखी, ये प्याली कितनी प्यारी है, जैसे सुबह की पहली किरण, या माँ की मीठी फटकार सी न्यारी है। हर घूँट में है सुकून छुपा, जैसे घर की गर्माहट हो, थोड़ी-सी कड़वाहट भी इसमें, पर उसी में मिठास की आहट हो। पास रखी वो खाली कुर्सी, किसी अपने का इंतज़ार करे, या खुद से मिलने का मौका, कुछ पल दिल को उपहार करे। ये कॉफी नहीं, एक एहसास है, थोड़ा शहर, थोड़ा गाँव है, भागती दुनिया के बीचों-बीच, ये पल ही तो असली ठहराव है। ~ फ़िज़ा
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