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अब और नहीं

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ज़िंदगी तानाशाही से — नहीं चलेगी! नहीं चलेगी! नहीं चलेगी! सत्ता की भूख में, लालच की आग में— इंसानियत जले तो हुकूमत नहीं चलेगी! नहीं चलेगी! नहीं चलेगी! जब रक्षक ही गोली चलाएँ, तो बताओ— जनता किसके हवाले जाए? नहीं चलेगी! नहीं चलेगी! पहले रंग के नाम पर— दम! अब नागरिकता के नाम पर— दम! कितना ख़ून बहेगा और? कितना और सहेंगे हम? बस अब नहीं चलेगी! पलटो तख़्त— अभी! पलटो तख़्त— अभी! नहीं चलेगी तानाशाही! नहीं चलेगी! नहीं चलेगी! ~ फ़िज़ा