Tuesday, April 17, 2018

वक्त बे वक्त, वक्त निकल चूका !




वक्त बे वक्त, वक्त निकल चूका
सोचता हूँ मैं किधर जा चूका?

समय का क्या है चलता ही रहा
मुझे साथ क्यों लेकर चलता रहा?

जाना है वर्त्तमान से भविष्य की ओर
मुझे क्यों नहीं छोड़ दिया भूतकाल में?

वक्त भी बड़ा अजीब खिलाडी है
खेलते-खेलते हमें संग क्यों ले गया?

क्या कहें वक्त-वक्त की बात है
आजकल हमारा वक्त ही खराब है!

~ फ़िज़ा  
#happypoetrymonth

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