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Showing posts from 2016

खुश हूँ! चंद दोस्त हैं अब रह गए इस तरह...!!!

आज़ाद कर खुद को सभी से 'फ़िज़ा' ...

कब? आखिर कब?

जय हिन्द सेनानियों

मुझे दिवाली की शुभकामनाएं चाहिए तुमसे!!!

उसकी एक झलक ही सही ...!

जैसी करनी वैसी भरनी ...!

काली की शक्ति हूँ तो ममता माँ की!

इंसान !!!

शाम की मदमस्त लेहर

सुबह की धुंध और हरी घांस की सौंधी खुशबू...!

हिंदी दिवस की शुभकामनाएं

नयी धुप नयी हवा है चिलमन में

हर लहर कुछ कहती है मेरे संग

क्यों मैं हूँ यहाँ? क्यों?

क्या रंग है अापका?

अक्षरों से खेलते-खेलते ...!

एक दुखियारी बहुत बेचारी

हाय! कैसे कोई कहे ये है बरखा का खेल !!

कुछ लिखते क्यों नहीं ...!

माँ का जीवन सदा यही है

उसे इतनी ख़ुशी मिली जहां में ..!

आगे बढ़ो !

कुछ ख्वाब देखे रखे सिरहाने

दो-नाव में सवारी न करो तो ही अच्छा है...!!!

उसने फूल भेजे थे पिछले इतवार

बेहते ही जाऊँगी आवारा ...!

कितना अच्छा होता !!!!!

सुनी थी एक कहानी...

न थी कभी...!

गणतंत्र दिवस की सुबह ...

अब लाश है 'फ़िज़ा' मिन्नतें नहीं करती...!

बस इंतज़ार रहता है ...!!!

तो मैं चलूँ?