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Showing posts from May, 2016

एक दुखियारी बहुत बेचारी

हाय! कैसे कोई कहे ये है बरखा का खेल !!

कुछ लिखते क्यों नहीं ...!

माँ का जीवन सदा यही है

उसे इतनी ख़ुशी मिली जहां में ..!