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Showing posts from May, 2015

उसकी एक धुन पे चलने की सज़ा ये थी...

कुछ लोग यूँ आजकल मिलते हैं ...

न निकले बाहर न रहे भीतर सा

क्यों वक़्त ज़ाया करें ये एक जवाब बन जाता है !