एक घबराहट
एक घबराहट कुछ अजीब सा जैसे पेट में दर्द जाने क्या हो कोई अंदेशा नहीं धड़कन की गति बेचैन करती क्यों अंत यहीं हो मेरा के मुझे मालूम ही न हो के किस बात की थी ये घबराहट !!! ~ फ़िज़ा
ऐसा था कभी अपने थे सभी, हसींन लम्हें खुशियों का जहाँ ! राह में मिलीं कुछ तारिखियाँ, पलकों में नमीं आँखों में धुआँ !! एक आस बंधी हैं, दिल को है यकीन एक रोज़ तो होगी सेहर यहाँ !