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ये सुरों का वरदान है..

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  साड़ी की लहरों में सजी, सुरों का इक जहान है, हर थाप में धड़कता दिल, जैसे कोई अरमान है। हाथों की हर चोट में, एक लय का बयान है, ढोल की हर गूंज में, छुपा अपना पहचान है। मुस्कान में घुली हुई, रागों की मुस्कान है, हर सुर में बसता जैसे, जीवन का सम्मान है। ये सिर्फ़ ध्वनि नहीं, ये एक पुराना गान है, पीढ़ियों से बहता आया, ये सुरों का वरदान है। हर ताल में सजा हुआ, त्योहारों का सामान है, इस संगीत की धड़कन में, बसता पूरा जहान है। फ़िज़ा कहे इन सुरों में, उसका भी अरमान है, हर थाप में छुपा हुआ, दिल का एक बयान है। ~ फ़िज़ा 

बरसाती एहसास

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 बारिश की बूंदों में अश्क़ उतर आते है दोस्तों के साथ से ग़म संवर जाते हैं ! आग दिल में जले तो नूर भी साथ लाती है, हद से बढ़े तो ख़ुद को ही राख़ कर जाती है। कभी लम्स बनकर बारिश रूह को छू जाए, कभी सैलाब बनकर हर वहम बहा ले जाए। ज़िंदगी की कश्ती मौजों के दरमियाँ चले, कभी सजदे में झुके, कभी खुद में संभले। बरसाती छाते सी हालत, उलट-पुलट का सफ़र, फिर भी चलती रहती है साँसों की ये डगर। साल आते हैं, जाते हैं, वक़्त का क्या गिला, ज़िंदगी मुख़्तसर सही, इश्क़ से हो सिलसिला। सूरज पैग़ाम-ए-हयात दे, चाँद भी ‘फ़िज़ा’ नूर लुटाए, ज़िंदादिली में जो जी ले, वही मुकम्मल कहलाए। ~ फ़िज़ा