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Showing posts from May, 2017

ऊपर है बादल,उसके ऊपर आसमान

अभी मैं कच्ची हूँ ...

एक घबराहट

खुली हवा में खिली हूँ इस तरह...

बहारों ने खिलना सीखा दिया मुझे ...!

कहाँ जाते हो रुक जाओ !