Tuesday, June 25, 2019

ज़िन्दगी का एकमात्र फार्मूला



आशा जानती थी हमेशा से 
ज़िन्दगी का एकमात्र फार्मूला 
अकेले आना और अकेले जाना 
रीत यही उसने पहले से हैं जाना 
मगर होते-होते वक्त लग गया 
माता-पिता बहिन-भाई-सहेली
वक्त इन्हें साथ ले चलता गया  
धीरे-धीरे सखियाँ और घरवाले 
सभी अपनी-अपनी जगह ठहरे   
और उसे जीवन साथी मिल गया  
चलते-चलते वक़्त याद दिलाता
अकेले आना और अकेले जाना है 
मगर तब भीड़ की आदत पड़ गयी 
तब तक ज़िन्दगी अकेली पड़ गयी !

~ फ़िज़ा 

Thursday, May 09, 2019

डट के रहना निडर होकर नज़रें मिलाना



हलकी सी ही सही राहत मिली मुझे,
गर्दिश में जब हों हमारे सितारे,
आँख से आँख मिलाकर जियो प्यारे 
लोग बुरे दिनों को याद ज़रूर दिलाएं 
मगर आप इन सब से न मुँह मोड़ें 
ग़म न कर किसीका जब खुद हादसों से गुज़रे 
डट के रहना निडर होकर नज़रें मिलाना 
के मौत से ज्यादा क्या गनीमत है और होना ?

~ फ़िज़ा 

Tuesday, April 30, 2019

केसरी रंग ये शाम की



केसरी रंग ये शाम की 
करती है बातें इशारे की 
कभी कहती है रुक जाओ 
के अभी ढलने में वक़्त है 
तो अभी ढल रही है शाम 
कल आने की लेती है कसम
इस जाने आने के सफर में 
इस ढलने में और बहलने में 
कितने अरमानों का आना 
कितने अंजामों का जाना 
हर रंग के रंगों में ढलकर 
देती है संदेसा बदलकर 
देख लो आज जी भरकर 
कल का रंग फिर नया होगा 
नए रंगों से नया श्रृंगार होगा 

~ फ़िज़ा 

Monday, April 29, 2019

अब कोई दर्द नहीं होता

मुझे अब कोई दर्द नहीं होता 
किसी बात का न लफ्ज़ का 
न किसी रवैये का नज़रअंदाज़ का 
मुझे जितना भी चाहो हराना 
मुझ से जितनी भी कर लो नफरत 
मेरी न करो इज्जत न इजाजत 
सामने होकर भी अनदेखा करलो 
कोई सवाल पर जवाब भी न दो 
मैं इन सब से आगे निकल गयी हूँ 
अब सबकुछ सुन्न सा पड़ गया है 
मुझे दर्द नहीं होता न ही कोई गिला
शायद तुम लाख कोशिश कर रहे हो 
अफ़सोस ये सब व्यर्थ है परिश्रम 
इसका एहसास दिलाया तुम्हीं ने 
और अब मैं आज़ाद हूँ हर ख़याल से 
अब कोई दर्द नहीं न आकांशा मेरी 
अब सब ठीक है और अत्यंत शांति है 


~ फ़िज़ा 

Sunday, April 28, 2019

पंछियों की गुफ्तगू


आज कहने को कुछ भी नहीं
पंछियों को गुफ्तगू करते देखा 
जहाँ दो साथी एक परिवार के 
गृहस्थी के रोज़मर्रे और ये झमेले 
दोनों निकले घर से बटोरने चने 
बटोरना तो मगर चुपके -चुपके 
क्यों न एक बटोरे चुपके-चुपके 
और दूजा देखे पेहरा देते-देते 
रंगीले जोड़ी की मिली-जुली  
हरकत तो देखो है एकता उनमें भी !

~ फ़िज़ा 

Saturday, April 27, 2019

खिलते मेहकते रहेंगे !



सितमगर  कम न होंगें 
मगर हम  चुप न रहेंगे 
ज़िन्दगी  की तल्खियां 
तो हमेशा ही साथ होंगे 
हौसले मगर कम न होंगे 
धुप-छाँव बाढ़ या सूखा 
तब भी हर बार निखरेंगे 
सतानेवाले कम न होंगे 
चाहे  रूप  अनेक होंगे 
रिश्ते  बे-रिश्ते भी होंगे 
फिर भी मुस्कुराते रहेंगे 
खिलते मेहकते रहेंगे !

~ फ़िज़ा 

Friday, April 26, 2019

हौसलों के परिंदे उड़ते हैं उड़ान



दिल की अंगड़ाई लेती है उड़ान 
अब न रुके ये रोकने से उड़ान 
बादलों को छुकर चला है उड़ान 
संभलना गिरा न दे उमंग उड़ान 
सुनेहरे सपनों से सजी है उड़ान 
देखो सूर्यास्त तो नहीं है उड़ान 
पर दिए हैं आसमां छुलो उड़ान 
यूँ भी न उड़ो के गिर पड़े उड़ान 
हौसलों के परिंदे उड़ते हैं उड़ान 
सलीके से उड़ो तो हसीं है उड़ान 

~ फ़िज़ा 

नारी आज भी है पिछड़ी,परायी..!



जो बर्फीले जुल्म में 
या काँटों के सेज़ में
अन्याय के झोंकों में 
भेदभाव की आँधियों में 
बातों के कांच की चुभन में 
धिक्कार की बारिश में 
अत्याचार के बाढ़ में भी 
अपना सुकून खोजती हुई 
नारी आज भी सेहमी हुई 
सिकुड़ी हुई घबराई हुई 
संभलते -सँभालते हुए 
इस पीढ़ी से उस पीढ़ी तक 
सँवारते, बढ़ाते हुए चली आयी 
हाय नारी!
तेरी अब भी यही है कहानी 
जहाँ चाँद में घर खरीदें वहां 
नारी आज भी है पिछड़ी,परायी  
डराई, हताश, निराश सतायी !
फिर भी कहें सब सुन्दर नारी !!

~ फ़िज़ा 

Wednesday, April 24, 2019

मेरा दिलबर चाँद है वो



दूर रास्ते चले आये हम 
जाने-अनजाने मिले हम 
देखो तो सही कौन है वो 
मेरा दिलबर चाँद है वो 
देखा जो उसे इस तरह 
जलन से भरा दिल मेरा 
मैं भी बैठूंगी गोद तुम्हारे 
ऐसा ही हट मैंने किया 
देख-देख दुखी हुआ 
बस आंव न देखा तांव 
तस्वीर लेने दिल मचला
दीवानी 'फ़िज़ा' क्या होगा !

~ फ़िज़ा 

Tuesday, April 23, 2019

ज़िन्दगी के रास्ते ही हैं टेढ़े-मेढ़े




ज़िन्दगी के रास्ते ही हैं टेढ़े-मेढ़े 
यहाँ कहाँ किसी से ये संभले 
जब रास्ते ही हों टेढ़े-मेढ़े !
ज़िन्दगी खुद दगा देती है 
अब कोई और क्या देगा दे 
बस सोचो यही है रास्ते सबके 
और यही है सबका चलन 
कभी कोई संभल जाए तो 
कहीं आकर थम जाए फिर 
कोई संभलते इन्ही रास्तों पर 
निकल पड़ें और फिर गिर पड़े 
रास्ते हैं अनजाने और राही भी 
ऐसे में एक-दूसरे पर हो इलज़ाम 
ज़िन्दगी के रास्ते ही हैं टेढ़े-मेढ़े 
यहाँ कहाँ किसी से ये संभले 
जब रास्ते ही हों टेढ़े-मेढ़े !

~ फ़िज़ा 

Monday, April 22, 2019

पृथ्वी दिवस की शुभकामनाएं !




फूलों से कलियों से 
सुनी है कई बार दास्ताँ 
खुशहाल हो मेरा जहाँ 
तो खुश हूँ मैं भी वहां 
जब पड़ती है एक चोट 
सीने में मेरे वृक्ष्य के तब 
जड़ से लेकर कली तक
गुज़र कर चलती है दर्द 
जिसे लग जाता है वक्त 
ज़ख्म भरने में और बढ़नेमें 
फूल अच्छे लगते हैं सभी को 
हमारी जड़ों को रखें सलामत 
हम और तुम रहे आबाद यूँही 
सोचो गर यही हाल कोई करे 
तुम्हारा या तुम्हारे वंश का 
खत्म होगा जीवन इस गृह का 
सही समय से सीख लें हम 
करें पालन सयम का और 
जीएं और जीने दें सभी को 
क्या तेरा क्या मेरा जो ले जाए 
आज है तो कल नहीं बस 
पल भर का ये साथ है अपना 
चलो मिलकर वृक्ष लगाएं हम 
अपने लिए स्वस्थ वातावरण 
और इनके लिए कुछ जंगलें 
पृथ्वी दिवस की शुभकामनाएं !

~ फ़िज़ा 

ज़िन्दगी का एकमात्र फार्मूला

आशा जानती थी हमेशा से  ज़िन्दगी का एकमात्र फार्मूला  अकेले आना और अकेले जाना  रीत यही उसने पहले से हैं जाना  मगर होते-होते वक्त...