Friday, March 08, 2019

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस


बच्ची हूँ नादाँ भी शायद 
तब तक जब तक देखा नहीं 
और देखा भी तो क्या देखा 
सिर्फ अत्याचार और कुछ नहीं 
कभी बात-बात पर टोका-तानी 
तो कभी ये कहना लड़की हो तुम 
बात-बात पर दायरे में रखना 
कहकर बस में नहीं तेरे जानी 
तुम लड़की हो तुमसे नहीं होनी 
बरसों का ये रिवाज़ यूँही बनी 
और हर पीढ़ी ये सोच चुप रही 
है रीती यही है निति चुप रहो 
लड़की में वाक़ई है कुछ बात 
जो वो कुछ भी नहीं कर सकती 
वक्त आया है भ्रम तोड़ने का 
इतिहास गवाह है पन्ने -पन्ने का 
नारी में है जो बात शायद वो सही है 
आदमियों से कुछ खास वोही है 
जो निडर, कोमल शालीन सही 
मौका लेकर दिखलाये रंग नया 
तोड़ दो भेद-भाव का ये ज़ंजीर 
समाज में चलना कदम बढ़ाये 
एक साथ और एक समान 
चाहे फिर वो हो नर या नारी !

~ फ़िज़ा 

Friday, March 01, 2019

देश का गौरव लौटकर आया...!


देश का गौरव लौटकर आया 
करें सब अभिनन्दन उसका 
धैर्यशील, सभ्य, शालीन, निडर 
देश का लाल घर वापिस आया 
पाक जो था अपना हिस्सा 
काश वो अब भी रहता वैसा  
भारत का ही कहलाता तब 
गए ज़माने के करतबों का 
क्यों भुक्तें अंजाम उसका 
आतंकवादी घुस बैठें है 
करें ध्वंस हर देश की शांति 
चलो मिलकर करें उद्धार 
शांतिप्रस्ताव का वो सम्मान 
आज देश है भारत और पाक 
इनके झगड़े का आंतक ले नफा 
युद्ध में शहीद होते है सिपाही 
दोनों तरफ के गौरवशाली 
कीमत जानें खून जाये न खाली 
करें हिफाज़त अपनों की इंसानों की 
चाहे वो हों इंसान कहीं के भी 
शांति अमन रखें कायम यही नियति  !

~ फ़िज़ा 

ढूंढ़ने निकला हूँ मैं अपने ही सफर में खुद को !

ढूंढ़ने निकला हूँ मैं अपने ही सफर में  खुद को ! बदल जाती हैं मेरी राहें दूसरों  के सफर में  खुद को भुलाकर उस राह निकल गया मैं  क...