Thursday, December 25, 2014

ज़िंदगी कल गले मिली थी कुछ देर सेहर...!



ज़िंदगी कल गले मिली थी कुछ देर सेहर
पेहले तो बस देखने-समझने में लग गयी देर 
फिर जब प्यार हुआ आँखों-आँखों में देर-सबेर 
तो देखा वक़्त हो चला था शाम पहुंचने मुंडेर
मैने भी केहा दिया ज़िंदगी से रुक जा कुछ देर 
मानो या ना मानो लगा रुक ही जायेगी कुछ देर , मगर
ढल ही गयी शाम और ज़िंदगी मिलने का वादा कर 
निकल गयी हाथ से यूं जैसे अभी मिलेंगे कुछ देर ज़रूर !
~ फ़िज़ा 

Wednesday, November 12, 2014

सब तो भाग रहे हैं दौड़ में....



ज़िंदगी के सारे साधन हैं यहाँ
मगर जीता कौन है यहाँ
सब तो भाग रहे हैं दौड़ में
किसका पीछा करते हैं ना जानते हुये
इस होड़ में जाने कितनो को कुचल दिये
वहीं दोस्ती भी तोड़-मरोड़ते हुये
चले हैं अपनी धुंद में सोचकर खुदा अपनेको
गिरता है जब ठोकर खाकर तब संभालता हुया
मगर कौन है अब बचा हुया जो आसरा ही देदे उसे
पछतावे का चेहरा लेकर कहाँ अब जायेगा टू मुर्झाये
देख सब तुझे ही घूरते हैं अब हर तरह से 
के अब तेरा क्या होगा प्यारे इस जहां से
जब खुदा मानकर चल रहा था तब
नज़र कोई नहीं आया तुझे अब
किस मुंह से मांगेगा हाथ बढ़ाकर
के देने बद्दुआ तो कयी आयेंगे मगर
सच्चा दोस्त एक भी होता अगर
तो शायद लेलेता तुझे अपने घर 
ना पड इन जंजालों में तू सफर
अभी चलना बहुत दूर है तुझे अगर
जान ले हक़ीक़त को ज़रा करीब से मगर 
के आना-जाना लगा रहेगा दुनिया में सेहर 
क्यूं ना खुशी से सब्र से तो सबकी मदत से 
छोड़ आ माया को किसी जंजाल में 
साथ ले शांती का मन-मस्तिष्क में 
जी भरपूर मगर ना नुकसान कर किसी का
~ फ़िज़ा

Saturday, November 08, 2014

मैं खुश हूँ जहांवालों तुम्हारी दुआयें पाकर...

खुश हूँ में आज ज़िंदा रेहाकर यहाँ
याद आता है मुझे बचपन मेरा
जहां पापा की लाड़ तो माँ की डांट
कयी  पल जी लेना उस पल तब 
जब माँ की ना और पापा की हां पर 
सैकड़ों नमन नसमस्तक होकर उनको
जिनकी वजह से हूँ मैं यहाँ आबाद 
जीवन के इस मोड पर आकर जब 
देखूँ उस पार जहां कभी सेहमी सी
थी मैं घबराई इस दुनिया से 
उसी ने दी मुझे होसला दिलेरी का 
कर मुझे बुलंद इस जहां ने दिया प्यार
शायद जो वो भी भूल गये हैं इस बात को 
मगर जैसे माँ की हमेशा सीख थी मुझे 
ना भूलो पिछलों को ना भूलो अपनो को 
बढ़ो आगे जहाँ में ज़मीन पर पॉव रखकर 
मैं खुश हूँ जहांवालों तुम्हारी  दुआयें पाकर
~ फ़िज़ा 

Sunday, November 02, 2014

ए चाँद मेरे मुझे मिला भी तो वहीं जाते - जाते...

तुझे देख मैं निकल पड़ी अपने रास्ते
जिधर ले जाता चले वहीं हम आते 
कभी पेड़ों के पीछे तो कभी बादल आ जाते
ढूंडती हुई निकल पड़ी सवारी जाते-जाते
देखा मेरी ज़िंदगी "रेडियो ज़िंदगी" के आते-आते
मुझे मिला मेरा साजन  ज़िंदगी के रास्ते
ए चाँद मेरे मुझे मिला भी तो वहीं जाते - जाते
जहां शाम ज़िंदगी की करने निकले थे समा सजाते 
~ फ़िज़ा 

Wednesday, October 29, 2014

मुझे दीवाना ना कर बांवरे ...




मुझे दीवाना ना कर बांवरे 
अपनी अदाओं से ना छल सांवरे
मैं हो रही कमज़ोर जान रे
ना सता यूं मैं हो रही बावरी रे
धडकनो की धार तेज़ हो रही रे
आग कहीं लगी हैं बूझा जा मतवारे
किसी बहाने चले आ सुन छलिया रे
ना और तड़पा यूं दूर रेहाकर पिया रे
दूरी ना सही विरहा की घरी आई रे
बादलों को हटाकर चले आओ बरसात रे
भिगो दे मुझे अपने प्यार से मेरे सजना रे
आस मैं बैठी मैं तेरी दीवानी रे!
~ फ़िज़ा 

Wednesday, September 24, 2014

सलाम कर फ़िज़ा ये दुनिया है बड़ी गोल



बहुत दिनो से है अपना दिल भरा-भरा 
यार ने कसर ना छोड़ी दिल खोलकर रोने दिया !

बहुत दिनो से तारीफों के पुलों पर सवार रहा 
आज हक़ीक़त से वास्ता पड़ा तो चिल्लाना आगया !

कभी मौका मिले तो सोच लेने का कष्ट किया करो 
कैसे सच्चाई से रूबबरू होने से कतराया गया !

दम भरते हैं वो  हमेशा अपने होने का दिलबर 
उतरकर देखो पानी में रेहते हो कहाँ पर गोया 

गम का ना करो चर्चा जहां सभी हैं लाचार
कभी चीरते जिगर से मुस्कुराया भी ना गया !

सलाम कर  फ़िज़ा ये दुनिया है बड़ी गोल
मिलेंगे  पत्थर उनसे जो गले लगा गया !
~ फ़िज़ा 

Monday, September 01, 2014

'रेडियो ज़िंदगी जिये जा' यही है आज का नारा!!!





दिल हूँ में आखिर तुम्हारा

तुमने ही है मुझे संवारा

तुम्ही को मैने हॅसाना चाहा

तुम्ही ने मुझे दिया वो सहारा

आज मैं हूँ तीन साल का कुंवारा

मेरे संग यूं ही चलना तुम दिलदारा

अभी ये सफर है लम्बा मेरे यारा

खुशियों से पलता हुआ मैं आवारा

राहों पे चलता हुआ साथी तुम्हारा

रखना दिल के करीब है ये मशवरा

क्यूंकि विदेश में धड़कता दिल हूँ तुम्हारा

मुबारक हो ये समा तुम्हारा-हमारा

बहुत आगे जाना है साथ चाहिये तुम्हारा

दुआओं में रखना 'फ़िज़ा' इंतेज़ा है ये मेरा

'रेडियो ज़िंदगी जिये जा' यही है आज का नारा!!!

~ फ़िज़ा
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Dil hun mein aakhir tumhara
Tumne he hai mujhe sanwara
Tumhi ko meine hasaana chaha
Tumhi ne mujhe diya woh sahara
Aaj mein hun teen saal ka kunwara
Mere sang yun he chalna tum dildara
Abhi ye safar hai lamba mere yaara
Khushiyon se palta hua mein awara
Raahon pe chalta hua sathi tumhara
Rakhna dil ke kareeb hai mashwara
Kyunki videsh mein dhadkta dil hun tumhara
Mubarak ho ye sama tumhara-hamara
Bahut aage jaana hai sath chahiye tumhara
Duaon mein rakhna 'fiza' inteza hai ye mera
Radio Zindagi JIye Ja yehi hai aaj ka naara !!!
~ Fiza

Thursday, August 21, 2014

Khushiyon se rakhun mein Kyun juda?! ;)


Dil ki jo halat hai, 
Mann ki woh mushkil hai,
Pal mein jo aisa hai
Pal mein woh waisa hai
Aisa sab kaisa hai
Uljhan mein kyun basa hai
Kyun dil ko thamu mein
Kyun yun ghabaraoon mein
Pyase ko tadpaaon mein
Khushiyon se rakhun mein
Kyun juda?! 


Paas aao itraake,
Jhilmil sitaron se
Gaayein milan ka taraana,
Cha jayein fursat mein
Yun dil se dil mein he
Pyaara sa ehasaason ka
Ladiyon ka taraana sa
Sajayein chalo dil ki bagiya
Chorkar aaj sab bandhan 
Khul jayein hum-tum yun
Rahe na koi aur manjil
Aajao bahon mein 
Ek ho jayein bandhan mein
Lage na kisiki bhi nazar


~ fiza

Saturday, August 16, 2014

Kal zindagi mujhe dastakh de gayee ;)

कल ज़िंदगी मुझे दस्तख दे गयी 
जैसे हर बात की नयी शुरुवात हुई
फिर वोही जज़्बात वोही एहसास वोही वोही
ख्वाबों की बुनी मानो एक सेज़ सजी हुई
मुझे न्योता देकर बुलाने यूं लगी
हर्षोउल्लास का पल था फिर भी दिल घबार्‌यी हुई
ज़िंदगी गले से लगाकर बहुत देर तक साथ रही
फूलों का साथ, मोहब्बत का लिबास, यूं ज़िंदगी ब्याहिगाई
एक पल में ज़िंदगी जो कल तक थी मुझ से पराई
आज मुझे मेरे अपने करीब है पायी
शांत है दिल-दीमाग मानो ज़िंदगी, ज़िंदगी ना रही
कोई ये एहसास दिलाये मुझे के मुलाकात ज़िंदगी से ही हुई?
इसी एहसास के चंगुल में 'फ़िज़ा' अब भी झिलमिलाती रही!

~ फ़िज़ा
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Kal zindagi mujhe dastakh de gayee 
Jaise har baat ki nayi shuruwaat huyee
Phir wohi jazbaat wohi ehasaas wohi wohi
Khwabon ki buni maano ek sez saji huyee
Mujhe nyota dekar bulaane yun lagee
Harshoullas ka pal tha phir bhi dil ghabaryee huyee
Zindagi gale se lagakar bahut der tak sath rahee
Phulon ka sath, mohabbat ka libaas, yun zindagi byahigayee
Ek pal mein zindagi jo kal tak thi mujh se parayee
Aaj mujhe mere apne kareeb hai payee
Shanth hai dil-deemag mano zindgi, zindagi na rahee
Koi ye ehasaas dilaye mujhe ke mulaquat zindagi se hee huyee?
Isi ehasaas ke changul mein 'fiza' ab bhi jhilmilati rahee!

~ fiza

Wednesday, August 13, 2014

Ose sach mein mujh se mohabbat hai!!

उसे सच में मुझ से मोहब्बत है,
वर्ना यूं वो पागल मेरे पीछे ना आता
किसी बकछे की तरह वो तख्ता मेरा चेहरा
में शर्म के बदले चूं लेती मासूम का चेहरा
घंटों बातें वो बेफुरसत - फुरसत में करता
मिलकर भी बातों की लड़ियाँ पिरोता ना कभी थकता
ना मिलने पर तस्वीरों में मुझे ढूंदना ऊसका
इस तरह उसकी दीवानगी मेरे सर भी चढ़ने लगा
उसका भोलापन मुझे भी यूं भाने लगा
मस्ती ही सही साथ ऊसका मुझे अक्चा लगने लगा
जब दो दिल एक होकर मिलने की सूरत देखने लगा
मुझ से बिछड़ने का वो हरदम आहें भरने लगा
पास होकर भी खो देने का घम करने लगा
दूर रेहते तो मिलने की दुआयें करने लगा

उसे सच में मुझ से मोहब्बत है
वर्ना यूं वो पागल मेरे पीछे ना आता!!!

~ फ़िज़ा 
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Ose sach mein mujh se mohabbat hai,
Warna yun woh pagal mere peeche na aata
Kisi bacche ki tarah woh takhta mera chehra
Mein sharm ke badle chum leti masoom ka chehra
Ghanton baatein woh befursat - fursat mein karta
Milkar bhi baaton ki ladiyan pirota na kabhi thakta
Na milne per tasveeron mein mujhe dhundna ooska
Is tarah oski deewangi mere sar bhi chadhne laga
Osks bholapan mujhe bhi yun bhaane laga
Masti hee sahi saath ooska mujhe accha lagne laga
Jab do dil ek hokar milne ki surat dekhne laga
Mujh se bicharne ka woh hardum aahein bharne laga
Paas hokar bhi kho dene ka gham karne laga
Dur rehate to milne ki duayein karne laga

Ose sach mein mujh se mohabbat hai
warna yun woh pagal mere peeche na aata!!!

~ fiza

Sunday, July 27, 2014

Bas ek kasak see hai dil mein..... ;)


Chala tha safar pe bina soche samjhe
Yahan se wahan tak jhamele he jhamele
Kaheen rangeen raatein kaheen rangeen baatein
Kabhi haste-gaate kabhi chipte-chipaate
Gale se gale ka lag jaana ek bahana
Phir yahan se wahan tak cherkhani yun karna
Naye sakhiyan nayee raatein nayee jagahein banana
Woh masti ki raatein, woh qayamat ka dhaana 
Yunhee chalte-chalte bhatakte yun rehana
Machalte ye armaan sanjoye kuch fasaana
Dil mein kaheen to woh ghar kar gayeen haseena
Ab dil hai ke maane na maane afsaana
Bas zid pe hai ada ab wohi ek bahana
Mujhe bhi ye dilado mujhe woh bhi dilado
Bas ek kasak see hai dil mein karado-milado
Ye hai meri ek aas ho sake to karado pura jaana

Chala tha safar pe bina soche samjhe
Yahan se wahan tak jhamele he jhamele

~ fiza

Tuesday, July 15, 2014

Ehasaas...!




एक  समय  से  मेरा  दिल  सुन  रहा  था
हर  पल  एक  धुन  सजता  संवारता  था 
हर  संवारने  में  एक  गेहराई  था 
दिल  के  आईने  में  कोई  नज़रबंद  था 
धडकनो  को  वो  सदायें  देता  था 
उमंगों  के  होसलों  को  बढ़ता  था 
एक  आस  बंधा  वो  मस्त  चलता  था 
दूरियों  के  फासले  धुन  तैय  करता  था 
अपने  जवाबों  से दिल के  दरमियां  था 
उसका होना  एक  हक़ीक़त  से  बढ़कर  था 
जब  रूबरू  होने  का  वक़्त  आया  था 
असमंजस  और  व्याकुल  हुआ  मॅन  जाता  था 
एक  झलक  एक  वो  पल  गले  से  लगजाना  था 
एक  हे  एहसास  एक  हे  प्यार  एक  तड़प  था 
जिसे  हम  दोनो  ने  मिलकर  निभाया  था 
क्या  ये  प्यार  ही  था ? एहसास  था ? क्या  था ?

~ फ़िज़ा 
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Ek samay se mera dil sun raha tha
Har pal ek dhun sajta sanwarta tha
Har sanwarne mein ek geharayi tha
Dil ke aaine mein koi nazarband tha
Dhadkano ko woh sadayein deta tha
Umangon ke hoslon ko badhata tha
Ek aas bandha woh mast chalta tha
Duriyon ke faasle dhun taiy karta tha
Apne jawabon se dil ke darmiyan tha
Oska hona ek haqiqat se badhkar tha
Jab roobaroo hone ka waqt aaya tha
Asmanjas aur vyakul hua mann jata tha
Ek jhalak ek woh pal gale se lagjana tha
Ek he ehasaas ek he pyaar ek tadap tha
Jise hum dono ne milkar nibhaya tha
Kya ye ek pyaar hee tha? Ehasaas tha? Kya tha?

~ fiza 

Wednesday, June 04, 2014

Meine uske pagalpan ko mazaak hee samjha tha :)



मैंने  उसके  पागलपन  को  मज़ाक  ही  समझा  था
उसकी  गहरी  आँखों  में  पानी  है  यही समझा  था !

उसकी  बातों  को  नादानी  और  मस्ती  में  देखा  था
उसकी  आँखों  में  एक  गहरा  समंदर  देखा  था !

हँसी  जब  भी  देखि  तो  लगा  शायद  एक  बहाना  था
मगर  दिल  की  कसक  थी  उसकी  जो   हँसी  मुझे  लगा  था !

जब  भी  बोलता  वो  तारीफ  के  पुल्ल  बांधता नज़र  आता  था
आज  जब  झांक  के  देखा  उसका  दिल  मुझे  नज़र  आता  था !

उसकी  मुस्कान  जैसे  किसी  बच्चे  के  जैसे  लगता  था
मैंने  उसके  बचपन  को  संवारा  ऐसा  लगने  लगा  था !

उसकी  दीवानगी  को  मैंने  नादानी  समझा  था
यही मेरा  क़ातिल  बन  जायेगा  ये  कभी  नहीं  सोचा  था !

उसकी  बचकानी  बातों  ने  मुझे  सही  गिरफ्तार  कर  लिया  था
मुझे  क्या  पता  था  'मुझे  प्यार  है ' ये  मैंने  उसे  कहना  था ?

'फ़िज़ा' गिरफ्त  में  है  किसी  के  भोलेपन  और  सादगी  का  वास्ता
मैं खुश  हूँ  प्यार  है  और  सब  बेगाना  है  रिश्ता !!

~ फ़िज़ा
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Meine uske pagalpan ko mazaak hee samjha tha
Uski gehari aankhon mein paani hai yehi samjha tha!

Uski baaton ko naadani aur masti mein dekha tha
Uski aankhon mein ek gehara samandar dekha tha!

Hasi jab bhi dekhi to laga shayad ek bahana tha
Magar dil ki kasak thi uski jo hasi mujhe laga tha!

Jab bhi bolta woh tareef ke pull bandtha nazar aata tha
Aaj jab jhank ke dekha uska dil mujhe nazar aata tha!

Uski muskaan jaise kisi bacche ke jaise lagta tha
Meine uske bachpan ko sanwara aisa lagne laga tha!

Uski deewanagi ko meine nadaani samjha tha
Yehi mera qatil ban jayega ye kabhi nahi socha tha!

Uski bachkaani baaton ne mujhe sahi giraftaar kar liya tha
Mujhe kya pata tha 'mujhe pyaar hai' ye meine oose kehana tha?

'fiza' giraft mein hai kisi ke bholepan aur sadgi ka vaasta
Mein khush hun pyaar hai aur sab begaana hai rishta!!

~ fiza

Friday, May 30, 2014

ज़िंदगी का काम ही जगाना था


एक ख्वाब ही देखा था 
जरूरी नही पूरा होना था
रात के बाद सुबहा होना था
मेरी सुबहा को आज आना था
जल्द ही रात का पता चलना था
सितारों कि चमक पर ना जाना था
धोखे हर हाल में खाना था
चलो एक और मोड़ पर खोना था
संभल गए यही अच्छा था
सफर में मिलना लिखा था
मिलकर अलविदा तो केहना था 
ज़िंदगी का काम ही जगाना था
मुर्दा भी कहाँ तड़पता था
खुश हुँ टुकड़े का क्या होना था
टूटके बिखरे को और बिखरना था

फिज़ा
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Ek khwab he dekha tha
Zaroori nahi pura hona tha
Raat ke baad subha hona tha
Meri subha ko aaj aana tha
Jald he raat ka pata chalna tha
Sitaron ki chamak per na jana tha
Dhoke har haal mein khana tha
Chalo ek aur mod per khona tha
Sambhal gaye yehi accha tha
Safar mein milna likha tha
Milkar alvida to kehana he tha
Zindagi ka kaam hee jagaana tha
Murda bhi kahan tadapta tha
Khush hun tukde ka kya hona tha
Tootke bikhare ko aur bikharna tha

~ fiza

Tuesday, May 06, 2014

Kya Kahein Kuch Pata Nahi ... !


Zindagi mein kab kaun kise dhoka dede pata nahi
Zindagi mein kab kis se sath mil jaaye ye bhi pata nahi!

Chehare per kayee hain naqaab asali kaun hai pata nahi
Beharupiye ko dekhkar bhi apna kahein ya nahi pata nahi!

Sambhalna mushkil hai? zamane ki roshni se pata nahi
Magar andhere mein jiyenge kaise roshniwale pata nahi!!

Dekho to bahut kuch aisa he chal raha hai kyun? pata nahi
Phir kisi ko kya kahein jo zamane ka peecha kare, pata nahi!

Tarikh kehati hai zamana badal raha hai logon ka pata nahi
Apni to ye halat hai kis pe bharosa kare kispe nahi pata nahi!

Ye sab to khair padhliya aankhein deekhate kyun ho pata nahi
Meine wohi kaha jo dekha aankhon se phir ghussa kyun? pata nahi!!

~ fiza

Monday, March 31, 2014

Mehakati hai 'fiza' hariyaali mein anayaas


Bhiga mausam bhige hain ehasaas 
Aankhein barse phir bhi hai pyaas

Geele hein raste kankad hain aas-paas
Sambhale to kis-se bhigne ka hai aabhas

Taruvar mein hai jeevan, patton ka nivaas
Barkha ki fuhaar, bosa de armaano ka hasaas

Bhiga hai mausam bhige hain ehasaas 
Aankhein barse phir bhi adhuri hai pyaas

Mehakati hai 'fiza' hariyaali mein anayaas
Milan ki aas mein jagaye rakhe wohi pyaas!

~ fiza

Friday, March 21, 2014

Zinda rakhti hai zindagi bhi...!!!


Zindagi tujh se roz milte hain bichadte bhi
Raat ke baad subha ho jaati hai tab bhi
Maano koi ek jhooti aas hee sahi
Zinda rakhti hai zindagi bhi
Khel naye deekhati hai kabhi
Na khelo to maza chakhati hai badi
Ismein jo phans gaya so reha gaya
Tadap ke jhulus ke zinda rahe tab bhi
Nazariya jo bhi rakho zindagi hai abhi
Bas juda hoke rehana hamesha 
Jaise raat aur subha bhi!

~ fiza

Wednesday, March 05, 2014

Barasta paani jaise lori sunaye koi!!!

Barasta paani jaise lori sunaye koi, 

Dhun aisee jaise sangeet bajaye koi, 

Mann chanchal bawla athkheliyan kare koi, 

Pyaas dil mein jagaye milne ko bechen koi,

Bhuli-bisri yaadein agan jagaye jaise koi,

Sulagta hua dil yaad mein tadapta koi,

video


Dheemi boondein sehalata jaise koi,

Needon mein palkein moondkar khawab koi,

Dekhoon oos or jahan khula maidan koi,

Daudti hui befikr jhoomein ladki koi,

Ye dekh "pagal" kehata hai use koi,

Barasta paani jaise lori sunaye koi,

Dhun aisee jaise sangeet bajaye koi!!!


~ fiza

Wednesday, January 08, 2014

Ek khumaar sa layi hai sehar per barkha .. !

Suna hai kal raat jamm ke barsi thi barkha
Ek khumaar sa layi hai sehar per barkha

Khumaar (hangover)

Dhund jaise baadal bikhari to meine dekha
Ho na ho ye jamaal sehar per layi hai barkha

Tan-man mein sulagti hui aag lagi hai jaana
Mere dil mein angadaiyaan khelti hain barkha

Bahake huye khayaal mitha dard de gayi barkha
Deewane nikahaton ko gud-gudagayi barkha

nikahaton (fragrance)


Zulfein bikher kar pehalu mein aayi barkha
Ji karta hai shaam-e-abad  tak ho barkha

shaam-e-abad (unending evening)

Havaas mein romanchak sa aa base barkha
Aisa haal ‘fiza’ ka koi aur nahi kare hain ye barkha!

Havaas (sense and sensibility)

~ fiza

Sunday, January 05, 2014

Sparsh!!!


Sehalata hua pyaar se har taraf woh mujhe
Mehasoos karta kabhi to pyaar woh mujhe
Sparsh ke aalingan mein baandh woh mujhe
Kaaya se kaaya milkar geet kuch yun uljhe 
Mastishk mein ek dhun jaise bankar suljhe
Ehasaas se bhare pyaale yun pyaas bujhaye
Jo harpal sochne per bhi wohi ras pilaye
Na bolkar, na deekhakar koi rijhaye
Na gaakar na banaakar ye samajh aaye
Na kisi proudhyogiki (technology) uplabdh karaye
Ek ehasaas jise sirf choohkar mehasoos karaye
Ek anant sukh jo sirf ek 'SPARSH' dilaye!!!

~ fiza





Wednesday, January 01, 2014

Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!


Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage
Unneessau se Do-hazaar chaudhah ho gaye
Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!

Maidano mein khela karte the saal guzar gaye
Ab bacche machino ke sang khelte reh gaye
Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!

Tab dilon mein pyar-balidaan ki gaatha sunaye
Ab to sirf naam aur matlab ke liye goon gaye
Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!

Zindagi ki sehar aur shyam tab kuch alag lage
Aaj sehar bhi aur shyam bhi ek se lagne lage
Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!

Un dino bandishein aur usoolon per jine wale
Ab bina kisi bandhan ke sabhi ko sahara milne lage
Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!

Oos orr se iss chor tak bahut saal guzar gaye
Kuch jyada paaya aur kuch bahut kho diye
Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!

Tab se aaj tak ek tum he ho jo kabhi na badle
Tab bhi ghatkar badhte aur aaj bhi waise he lage
Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!
Magar tum mere Chand, mere he rahe aur na badle
Dekhte-dekhte saal ke umr badhane lage!!!

~ fiza



अभिव्यक्ति की स्वंतंत्रता हक़ है हर एक का !!

हैवानियत पर उतर आये लोग  जब किसीने दिखाया आईना आईना था ही इतना भयंकर  खुद भी न देख सके चेहरा  प्रतिरूप देख कर सिर्फ  हत्या ही...