एक शाम—चाय की चुस्की और दोस्ती के नाम।


 

दोस्ती भी चाय की तलब-सी है,
जब लगे तो मिले बिना कहाँ रहती है।
झटपट फोन घुमाया,
मिलने का वक्त और जगह तय हो आई,
फिर फोन रखने की देर थी बस—
एक प्यारी-सी शाम चली आई।
चाय की चुस्कियों में कुछ बातें घुलीं,
कुछ हँसी की फुहारें खुलीं,
कुछ पुरानी यादें फिर मुस्कुराईं,
कुछ अनकही बातें दिल तक उतर आईं।
न कोई खास वजह, न कोई बहाना,
बस दोस्तों का साथ और चाय का प्याला,
हर घूँट में अपनापन,
हर पल में पुराना-सा अफसाना…
कुछ रिश्ते ऐसे ही तो खास होते हैं,
चाय की तरह—
कम हों तो याद आते हैं,
मिलें तो दिल भर जाते हैं।
एक शाम—चाय की चुस्की और दोस्ती के नाम।
~ फ़िज़ा

Comments

Anita said…
वाह!! चाय की चाय और दोस्ती का आनंद

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