Thursday, January 28, 2016

न थी कभी...!


न थी कभी ऐसी ज़िन्दगी
न थी किसी से कोई बंदगी 
मुश्किल में साथ थी हौसला 
न थी कभी ऐसी ज़िन्दगी 
न थी किसी से कोई बंदगी !

हर हाल में सीखा मुस्कुराना 
दिया हौसले का नज़राना 
न हताश हुई ये ज़िंदगानी 
न थी कभी ऐसी ज़िन्दगी 
न थी किसी से कोई बंदगी !

वो पल भी आया थक गए 
वक़्त आया अब निकल गए  
न  जीने की लालसा रही कोई 
न थी कभी ऐसी ज़िन्दगी 
न थी किसी से कोई बंदगी !

सूखे पत्तों का ढेर है अब 
चाहो तो तिल्ली झोंकलो अब 
जलने का न डर  है कोई 
न थी कभी ऐसी ज़िन्दगी 
न थी किसी से कोई बंदगी !

~ फ़िज़ा 

No comments:

मोहब्बत ही न होता तो मैं कहाँ होता?

मोहब्बत में मैं नहीं होता तो खुदा होता  मोहब्बत ही न होता तो मैं कहाँ होता? फ़िज़ा में दिन नहीं होता तो क्या होता?  दिन नहीं जब हो...