Sunday, April 15, 2018

दर्द होता है सीने में मेरे भी मगर ...!




तड़पता है दिल किसी को देख के
कोई माने या न माने दुख होता है !

कभी चाहा नहीं जानकार क्रूरता
अनजाने में ही ग़लती हो जाती है !

दर्द होता है सीने में मेरे भी मगर
कैसे इज़हार करूँ जब मानोगे नहीं !

किसे सज़ा दे रहे हो ये जानते नहीं
प्यार करते हैं तभी तो दुखता है दिल !

क्यों बैर द्वेष से जीना है ज़िन्दगी
जब कुछ पल की ही है ज़िन्दगी !

जो कहो करने के लिए है तैयार फ़िज़ा
सब छोड़कर बस हुकुम तो करो ज़रा !  

~ फ़िज़ा 
#happypoetrymonth

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