Saturday, April 06, 2019

बिखर गया है जीवन सारा...



बिखर गया है जीवन सारा
ऐसा ही कुछ लगता है अब 
जन्में कहीं पले -बढे भी वहीं 
किसका रास्ता ढूंढ रहे थे 
जाने-अनजाने चले आये यहाँ 
रोटी, कपडा और मकान तलाशे 
जैसे-तैसे बसाया घर अपना 
अपने घर को ही भूल गए 
सदियों हुए फले -फुले 
यहीं शायद बिखर भी जाएं 
किसको है मंज़िल का पता
आये हैं तो जायेंगे भी फिर 
बस बारी-बारी जाना है 
बिखर गया है जीवन सारा
ऐसा ही कुछ लगता है अब 
ऐसा ही कुछ लगता है अब !

~ फ़िज़ा 

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