Sunday, February 12, 2006

किसी सौदाई की चाहत में जिसे ठुकराया कभी...!!

(जैसा के मैंने पेहले भी कहा है इस तकनीकी की अधिक जानकारी नहीं होने की वजह से अलफाजों को पढने में दिककत हो सकती है, मैं इसके लिऐ माफी चाहुँगी ‌ )

बडे दिनों से मैं अपनी लिखी गजल...जो के गजल की परिभाषा से बिलकुल भी मेल नही खाते ... मेरा मानना है के शायरी को जिस मीटर याने बेहर में लिखना चाहिऐ....मैं उस मुकाम तक नहीं पहुँची हुँ!!!!
किंतु जैसा कहा जाता है ...कोशिशें अकसर सफलता की ओर ले जाती हैं ‌
मेरी भी ऍक कोशिश....ऍक परयास...देखें मुझे किस तरह से मेरे साथी इसिलाह देते हैं....
अरज किया है ....

उसी का जिकर किया करती थीं सरद हवा कभी
जो मन मंदिर में मेरे रेहता था कभी ‌

यही रफीक था जो आज हम से शकी है
बिना कहे दिलों की बात जानता था कभी ‌

जैसे परियों का फलक से हो उतरना धरती पे
उस की बातें मेरे दिल में थीं पोशीदा कभी ‌

उस के हर लफज से आती थी वफा की खुशबु
किसी सौदाई की चाहत में जिसे ठुकराया कभी ‌

अब ~फिजा~ हो जो पशेमान तो चारा कया है
अपने हाथों से गँवाईं थीं कई खुशियाँ कभी ‌ ‌


~फिजा

4 comments:

Kumar Chetan said...

dil jo tuta aapka to ek hagama hua,
hamare dil ke tukdo par se to duniya guzar gayi.
Fiza, mera dil hazaar baar tutkar jud giya, shayad ye besharmi ki had hai,
halat ye hai ke kabhi kabhi kehna padta hai ke
"gar meri ankhen nam nahi to kya muje gam nahi."
jaanti ho gam aur maut hi sache wafadaar hain, ye jindagi aur ye khushiyan kabhi bhi chodkar chali jayengi.
lekin main, gam se hi bewafa ho giya, use pane paas ane hi nahi deta.
Rahi baat tumhari koshish ki to achi koshish hai.
kamyabi nahi mili to kya shayar to ban gaye.
ghalib dil ke behlane ko yeh khyaal acha hai.
Chinni ko wish karne ke liye lots of thanks.

Nagu said...

kafi acchi koshish ki hain aap ne .
bahut khoob

PuNeEt said...

bahut hi khubsurat koshish

isi tarah khubsurat prayas karte rahiye...
aur khubsurat nagme pesh karte rahiye :-)

cheers

Dawn....सेहर said...

@kumar chettan: शुकरिया....जनाब देखिऐ आप भी शायरी करने लगे
खुश रहें सदा

@nagu:शुकरिया....दाद के लिऐ बहुत बहुत ममनुन हैं आपके

खुश रहें सदा

@puneet:आपकी फरमाईशें सर आँखों पर....कोशिश ही करने का परयास कर रहे हैं
शुकरिया....दाद के लिऐ बहुत बहुत ममनुन हैं आपके

खुश रहें सदा

भंवरें भी गुंजन गायेंगे !

पतझड़ का मौसम आया  और चला भी जायेगा  पुराने पत्ते खाद बन कर  नए कोपलें शाख पर  सजायेंगे ! तन्हाई भी कभी रूकती नहीं     रहगुज...