सर्द हवाओं ने फिर छेडी है जैसे

कल सुबह से ही बरसात अपनी ज़िद पर था और कारे-कारे घटा मानों तय कर के आऐं हों....
कल की सुबह वाकई रंगीन थी..ये बात और है के....रंगत को अमावस्‍या की हवा लग गई...;)....अर्ज किया है...
एक तूफानी रात...बिजली की कडकडाहट तो साँय-साँय करती हवा मानो जैसे कुछ ठानकर आई हो............

सर्द हवाओं ने फिर छेडी है जैसे
वही दिल के अरमानों को
किसी की याद सिने में...
आज भी धडक रही है ऐसे

रेह-रेह कर तुझे
बुलाती है....
आ ! फिर एक बार मुझे
अपना बनाने के लिये आ ऐसे

उसके आते ही ऐसा लगा जैसे
सर्द हवाओं का झोंका आया
एक तूफानी रात से भरी
घनघोर बारिश में जैसे

भीगी हुई जुल्‍फों से टपकता पानी
ये कह रही हों जैसे
झुम के बरसों बस
भीग जाने दो आज मुझे ऐसे

जब ठंड से पलकें खुलीं तो
देखा तूफान तो था
बारिश अब भी जोरों से बरस रही थी
और मैं......बस भीग रही थी....
हाँ!!! तूफानी बारिश में भीग रही थी ऐसे!!!!

~ फिज़ा

Comments

Manish said…
kal humare yahan bhi barish huyi :)
Mystique said…
I love rain! Bohot hi sundar kavita likhi hai aapne.
Nagu said…
some really fine lines.baarish mein bheegne ke ka mazaa sach mein sabse alag hota hain
@manish: lekin kya aapke wahan ab barish ka mausam hai ???? meine to suna tha ke garmi shuru hogayee hai ...:)

@mystique: dear...bahut dino baad aapke darshan huye...accha laga aapko yahan dekhkar...umeed hai aap naye pasandgee ke gaane lekar aayengi phir...:) shukriya!!!

@nagu: sach kaha...barish bhi prakruti ne kya khub banaya hai nai?....barish mein bheegna aur garam garam bhutte khana....aur hawe mein apne aapko sukhana....thand se thithurna...iska sab anand to ab sirf khayaalon aur khawabon tak hee wabasta rahe hein :)
shukriya dost pasandgee ka

cheers
Kumar Chetan said…
Lo G, Main to wapis a giya
@kumar chetan: lo ji humne bhi isiliye agli kavita pesh kar dee ;)

:)
Manish said…
ji nahin abhi mausam nahin ye bemausam ki barish hai ...

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