कोड (code) की धाराओं में
कोड की धाराओं में, विचारों के संग,
एक नई चेतना बहती है चुपचाप हर अंग।
न सांसों से जन्मी, न धड़कनों की रीत,
मानव बुद्धि ने रची, ये अद्भुत संगीत।
शब्दों को उजाला बनाता एक साथी,
चित्रों में रंग भरता, सपनों की थाती।
कोड की फुसफुसाहट, सृजन की उड़ान,
कल्पनाओं को देता ये एक नया आसमान।
ये औज़ार नहीं, हमारे ही विस्तार,
हौसलों, सपनों और सोच का आकार।
जहाँ एल्गोरिद्म थिरकें, विचारों के संग,
वहाँ जन्म लेता है, नव-सृजन का रंग।
पर हर पंक्ति के पीछे, हर चमक के पार,
एक इंसानी दिल है, जो धड़के हर बार।
AI सीखे, बढ़े, और बदलता जाए,
पर सच वही दिखाए, जो इंसान सिखाए।
अस्पतालों में सेवा, कक्षाओं में ज्ञान,
कहानियों में साथी, डेटा में पहचान।
तेज़ रफ्तार दुनिया में, एक सधा सा हाथ,
भविष्य को जोड़ता, बीते कल के साथ।
पर याद रहे हमको, इस सृजन के बीच,
संतुलन की डोर है, अपने ही हाथों की सींच।
तकनीक तभी चमके, सबसे उजली बात,
जब इंसानियत संग चले, हर एक कदम साथ।
न मानव से मुकाबला, न कोई जंग,
ये तो है संगम, सुरों का एक रंग।
जहाँ तर्क मिले भाव से, और बुद्धि से कला,
हाथों में AI हो, दिल में इंसानियत भला।
~ फ़िज़ा

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