ज़िन्दगी का ऐलान है।

 


ज़िन्दगी भी क्या ज़ोरदार है, हर साँस का यहाँ क़रार है,
जीने के लिए हर पल मेहनत, यही इसका असली सार है।

इंसान हो या कोई जीव, सबका एक ही व्यवहार है,
हर साँस के पीछे छुपा, खुद की कोशिशों का आधार है।

यहाँ हर किसी को अपना बोझ, खुद ही उठाना पड़ता है,
इस सफ़र में हर राही को, खुद ही बनना हमसफ़र है।

ज़िन्दगी किसी को नहीं बख़्शे, ये कैसा उसका व्यवहार है,
हर किसी को देना पड़ता, साँसों का भी जैसे किरदार है।

मेहनत की धूप में जलकर ही, मिलता सुकून का उपहार है,
ये जीवन एक इम्तिहान है, और जीना ही इसका स्वीकार है।

मैं भी इस राह का मुसाफ़िर, करता हर दिन संघर्ष अपार है,
जीना है तो जीना होगा, यही ज़िन्दगी का ऐलान है।

~ फ़िज़ा 

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