Sunday, April 30, 2017

मुझे पढ़ने वाले कभी सामने तो आओ...!

मुझे पढ़ने वाले कभी सामने तो आओ 
आइना हूँ दिल का पढ़लो कभी ये चेहरा
कब तक रहोगे पढ़ते मेरा छिपकर कलाम  
दे दिया करो दाद एक टिपण्णी का सहारा  
जान तो लूँ मैं भी है दिल में वो आग अब भी 
ज़िन्दगी जहाँ भी ले जाए इस दिल में है सदा 
मोहब्बत की नहीं नुमाइश ख़ुशी के हैं एहसास 
मुझे पढ़ने वाले कभी सामने तो आओ 
कभी सामने तो आओ !

~ फ़िज़ा 

No comments:

हर उड़ान पर दी थप-थपाई...

दुआओं से मांगकर लाये ज़मीन पर मुझे इस कदर प्यार से सींचा निहारकर भेद-भाव नहीं जीवनभर हर ख्वाइश की पूरी खुलकर उड़ने दिया हर पल पंछी बनकर हलक...