Wednesday, March 09, 2011

Something tht I read - I am neither bitter nor cynical but I do wish there was less immaturity in political thinking.
Franklin D. Roosevelt

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भंवरें भी गुंजन गायेंगे !

पतझड़ का मौसम आया  और चला भी जायेगा  पुराने पत्ते खाद बन कर  नए कोपलें शाख पर  सजायेंगे ! तन्हाई भी कभी रूकती नहीं     रहगुज...