सीमा !!


 हर चीज़ की एक सीमा होती है—

अच्छाई की भी, बुराई की भी,
ख़ूबसूरती और बदसूरती की भी।

सुनने की, देखने की,
सहने की भी एक हद होती है।
हर इंसान के भीतर
एक ख़ामोश रेखा खिंची होती है।

किसी को हक़ नहीं
कि वह शब्दों से ज़ख़्म दे,
सलाह के नाम पर चोट करे,
या ऊँची आवाज़ को ताक़त समझे।

कहते हैं न—
ज़्यादा मिठास भी
कभी-कभी कड़वी हो जाती है।

सभ्य होने का मतलब
यह नहीं कि कोई आपको शासित करे।
नर्मी भी एक शक्ति है।

और कभी-कभी—
चले जाना,
छोड़ देना,
सबसे बड़ा साहस होता है।

~ फ़िज़ा 

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