गुनेहगार 'फ़िज़ा' हो ....
गुफ्तगू हो मुलाकात हो जो भी हो
किसी को ना चाहते हुये, परेशन वो हो
मस्तियाँ हो, हॅसी-मज़ाक हो, संजीदा ना हो
कोई एक भी हो तो हर तरफ तूफान का अंदेशा हो
ज़ेहन की बात आई हो मगर केहना ज़रूरी हो?
ऐसी भी बात ना हो वर्ना हादसे जाने कितने हो
बातों से तंग करना कभी सताना भी हो
लेकिन इस खेल में चिंगारी हमेशा हो
किसी के इज़हार में कभी दिल्लगी हो
उसी की बातों में कभी सच्चाई हो
बातों में इज़हार में अफरा तफरी हो
एहसास में भी कुछ खास हो
हर सूरत हसीन हो, ना हाँ ना ना हो
तब भी हरतरफ से गुनेहगार 'फ़िज़ा' हो
~ फ़िज़ा
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