Monday, May 21, 2018

दिल में पनपते प्यार के बोल

कभी कुछ गरजते बादल
मंडराते हुए छाए बादल
एहसासों के अदल -बदल
विचारों में विमर्श का दख़ल
असमंजस, उलझनों का खेल
रखते हमेशा आसमां से मेल
फिर वो भी आये कुछ पल
बरसते कारवां लिए बादल  
गुद -गुदाहट से भरे हलचल
दिल में पनपते प्यार के बोल   
बरसना चाहे बादलों से घनघोर
हर बूँद एक बोसा भीगे गाल
भीगे फ़सानों से लरज़ते बाल
मानों डूबकर बरखा है बेहाल
हर तरफ से शुक्रगुज़ार बहराल  
गरजने से बेहतर बरसते बादल
यहाँ दरअसल हैं मुस्कुराते बादल !

~ फ़िज़ा

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