Friday, July 10, 2015

बहुत सालों बाद बचपन लौट आया था


बहुत सालों बाद बचपन लौट आया था 
किसी से इतने पास होने का एहसास अब हुआ था 
जाने कैसे बिताये इतने साल ये अंजाना था 
कुछ देर के लिए मानो भूल गया वक़्त हमारा था 
लगा हम लौट आये स्कूल की कक्षा में फिर 
उसी बेंच पर बैठकर बातें कर रहे थे कुछ देर 
भेद-भाव न था आज फिर भी मिलन पुराना था 
मानो जैसे पानी और दूध का मिलन था 
मिलने की देरी थी फिर जुदा न हो पाना था 
लौट आये हैं अपने घरोंदों में अब लेकिन 
एक बड़ा हिस्सा छोड़ आये उन्हीं गलियों में 
जहाँ हम सब पले -बढे और खेले थे !!!

~ फ़िज़ा 

No comments:

मोहब्बत ही न होता तो मैं कहाँ होता?

मोहब्बत में मैं नहीं होता तो खुदा होता  मोहब्बत ही न होता तो मैं कहाँ होता? फ़िज़ा में दिन नहीं होता तो क्या होता?  दिन नहीं जब हो...