Thursday, December 13, 2007

मेरे सपनों की बुनी एक किताब

ज़िदंगी में सपने कौन नहीं देखता...और फिर उन्‍हीं सपनों को सच करना एक ख्‍वाब से बढ़कर कुछ नहीं होता, तब तक जब तक कोई आपको प्रोत्‍साहित नहीं करता. जी हाँ, मैं दोस्‍तों की बात कर रही हूँ. मैंने एक सपना देखा है अपनी कविता की एक किताब...जो के मैं अपने मित्रों और निकटजनों की सहायता से और आप सभी साथियों के आशि॔वाद से नये साल की फरवरी महीने की चौदह तारिख तक पबलिश करने का प्रयत्‍न कर रही हूँ. आशा है मुझे आप सभी का सहयोग प्राप्‍त होगा...

ज़िंदगी में एक ख्‍वाब
मैंने भी बुना है

मन ही मन कुछ सिला है
पुरे होने की आरजू़ है
लेकिन साथ मेरा कोई दे..!?!

इसी की आकाँशा है!
दोस्‍तों का साथ हो

बडों का आशि॔वाद हो
मेरे सपनों की बुनी एक किताब
कहो! है न मेरे सर पर आपका हाथ?

~फिज़ा

8 comments:

sana said...

Hum sab ka aashirwad aap ke sath hai.Aasha karte hain ki aap ke sapno ka sakkar ho. Hum intezaar kar rahein hain aapke kitaab ka.

Humari shubkamnain aap ke saath hai.....

Dawn....सेहर said...

Shukriya dost....tum nahi gham nahi aur aisee tanhayee ka koi jawab nahi :)
mere sath sath chalne ka aur housla badhane ka bahut shukriya
Cheers

Mona said...

WoW! a blog in Hindi!

Hindi Blog with songs!!!

Mazaa aa gayaa!!! I Love reading hindi poetry and literature!

Best wishes for your new publication! I hope you reach heights of success!

Dawn....सेहर said...

mona: THank you so much Mona! boond boond se sagar bharta hai aur aapki shubhkamanayein isi tarah mera housla badha rahe hein :)
Shukriya aapki pasandagi ka
Cheers

jyotsana said...

arey yaar why did i not come across this earlier? love hindi poems. dil ko chhuti hain.

Dawn....सेहर said...

jyotsana: I am glad dear ke aapko bhi hindi kavitayein pasand hein :) isi bahane aap meri kitaab to khareedengi :D
Shukriya dear
Cheers

Vijay Kumar Sappatti said...

Dear sehar,

i came first time to your blog , i liked all your posts and specially your poems.

can i get your poem book - my email - vksappatti@gmail.com

Please visit my blog : http://poemsofvijay.blogspot.com/

Regards

Vijay
Hyderabad
India

Rajat Narula said...

इसी की आकाँशा है!
दोस्‍तों का साथ हो
बडों का आशि॔वाद हो
मेरे सपनों की बुनी एक किताब
कहो! है न मेरे सर पर आपका हाथ?

bahut sunder rachna hai..

भंवरें भी गुंजन गायेंगे !

पतझड़ का मौसम आया  और चला भी जायेगा  पुराने पत्ते खाद बन कर  नए कोपलें शाख पर  सजायेंगे ! तन्हाई भी कभी रूकती नहीं     रहगुज...